Lifestyle Adda: बच्चों के शारीरिक विकास में कैल्शियम की अहम जरूरत होती है। यह हड्डियों और दांतों को मजबूत बनाने में मदद करता है। जैसे-जैसे बच्चे बड़े होते हैं, शरीर की कैल्शियम जरूरत भी बढ़ती है। इसकी कमी होने पर हड्डियों की कमजोरी से लेकर दांतों और मांसपेशियों से जुड़ी परेशानियां दिखाई दे सकती हैं। ऐसे लक्षण नजर आएं तो डॉक्टर से सलाह लेकर जांच और इलाज कराना चाहिए।
हड्डियों और दांतों से मिल सकते हैं संकेत
कैल्शियम की कमी होने पर बच्चों की हड्डियां कमजोर हो सकती हैं। उन्हें चलने-फिरने में परेशानी या दर्द की शिकायत हो सकती है। छोटे बच्चों में उठने और बैठने में भी दिक्कत दिखाई दे सकती है।
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दांतों से जुड़ी समस्याएं भी ध्यान देने वाली हैं। नवजात या छोटे बच्चों में दांत देर से आना, दांत कमजोर होना या कैविटी की समस्या कैल्शियम की कमी से जुड़ी हो सकती है।
विकास धीमा हो तो भी दें ध्यान
कैल्शियम की कमी से मांसपेशियों में ऐंठन और दर्द की शिकायत हो सकती है। वहीं, अगर बच्चे की लंबाई और वजन अपेक्षित गति से नहीं बढ़ रहे हैं तो उसके शारीरिक विकास की डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।
लगातार चिड़चिड़ापन भी ध्यान देने वाला संकेत हो सकता है। हालांकि, किसी एक लक्षण के आधार पर कैल्शियम की कमी मान लेना सही नहीं है। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर जांच के बाद कारण स्पष्ट कर सकते हैं।
डाइट में शामिल करें कैल्शियम
बच्चों की डाइट में दूध, पनीर, दही और छाछ जैसे कैल्शियम वाले खाद्य पदार्थ शामिल किए जा सकते हैं। बादाम और अंजीर को भी आहार का हिस्सा बनाया जा सकता है।
विटामिन डी कैल्शियम के अवशोषण में मदद करता है। बच्चों को डॉक्टर की सलाह और मौसम के अनुसार सुरक्षित तरीके से धूप में खेलने का समय दिया जा सकता है।
कैल्शियम की कमी का संदेह होने पर खुद से कैल्शियम की दवा या सप्लीमेंट शुरू न करें। डॉक्टर से सलाह लेकर ही जांच और इलाज कराएं। नियमित स्वास्थ्य जांच से बच्चे के विकास पर भी नजर रखी जा सकती है।





