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बच्चों में तनाव के इन संकेतों को न करें नजरअंदाज, समय पर दें मदद

पढ़ाई, प्रतियोगिता, पारिवारिक माहौल और दूसरी परेशानियों का असर बच्चों के व्यवहार पर पड़ सकता है। उम्र के हिसाब से तनाव के संकेत अलग दिखते हैं, जिन्हें समय रहते पहचानना जरूरी है।

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Lifestyle Adda: पढ़ाई का दबाव, प्रतियोगिता, पारिवारिक तनाव और आसपास की नकारात्मक घटनाएं बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर असर डाल सकती हैं। कई बच्चे अपनी परेशानी खुलकर नहीं बताते। ऐसे में व्यवहार, नींद, खाने की आदत और शारीरिक शिकायतों में बदलाव तनाव का संकेत हो सकते हैं। संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) के अनुसार, बच्चों में तनाव के लक्षण उम्र के साथ अलग-अलग दिखाई दे सकते हैं।

छोटे बच्चों में ऐसे दिखता है तनाव

0 से 3 साल के बच्चों में तनाव होने पर वे अपने देखभाल करने वालों से ज्यादा चिपक सकते हैं। बिस्तर गीला करना या अंगूठा चूसने जैसे पुराने व्यवहार फिर शुरू हो सकते हैं। नींद और खाने के पैटर्न में बदलाव, ज्यादा चिड़चिड़ापन, लगातार रोना, बेचैनी और छोटी-छोटी बातों से डरना भी संकेत हो सकते हैं।

4 से 6 साल के बच्चों में भी बड़ों से चिपके रहना, पुराने व्यवहार दोहराना और सोने-खाने में बदलाव देखा जा सकता है। कुछ बच्चे खेलना बंद कर देते हैं, कम बोलते हैं या सामान्य से ज्यादा बेचैन नजर आते हैं।

बड़े बच्चों में बदल जाते हैं संकेत

7 से 12 साल के बच्चों में अकेले रहना, लगातार डरना, गुस्सा बढ़ना, नींद और खाने में बदलाव तथा याददाश्त कमजोर लगना तनाव के संकेत हो सकते हैं। सिरदर्द और पेट दर्द जैसी शारीरिक शिकायतें भी सामने आ सकती हैं।

13 से 17 साल के किशोरों में गहरा दुख, अपराधबोध, शर्मिंदगी, माता-पिता की बात न मानना, जोखिम भरा व्यवहार और गहरी निराशा जैसे संकेत दिख सकते हैं। खुद को नुकसान पहुंचाने की कोशिश को गंभीरता से लेना चाहिए।

गंभीर संकेत दिखें तो तुरंत मदद लें

सभी उम्र के बच्चों में थकान, सीने में जकड़न, सांस लेने में परेशानी, मुंह सूखना, पेट दर्द, सिरदर्द, कांपना और लगातार शरीर में दर्द जैसी शिकायतें भी हो सकती हैं। हालांकि, इन लक्षणों की वजह कोई शारीरिक बीमारी भी हो सकती है। इसलिए जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से जांच कराना उचित है।

पूरी तरह अलग-थलग रहना, बोलना बंद कर देना, लगातार कांपना, आक्रामक व्यवहार, खुद को या किसी दूसरे को चोट पहुंचाने की कोशिश और भ्रमित रहना गंभीर संकेत हैं। ऐसे मामलों में पेशेवर सहायता लेने में देरी नहीं करनी चाहिए।

बच्चे तनाव में हों तो उनसे उनकी भावनाओं के बारे में बात करें। उन्हें चित्र बनाने जैसी गतिविधियों के जरिए अपनी बात कहने का मौका भी दिया जा सकता है। नियमित खेलकूद, पर्याप्त नींद, संतुलित भोजन और माता-पिता का समय व ध्यान बच्चों को तनाव से निपटने में मदद कर सकते हैं।

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