फॉण्ट कनवर्टर NEW

डेंगू से बचाएगी क्यूडेंगा वैक्सीन: भारत में जल्द होगी लॉन्च, जानें डोज

टेकेडा और डॉ. रेड्डीज के सहयोग से भारत में 2027 तक उपलब्ध होने वाली क्यूडेंगा वैक्सीन डेंगू के चारों सीरोटाइप से बचाव करेगी और अस्पताल में भर्ती होने का जोखिम 90% तक घटाएगी।
डेंगू से बचाव के लिए क्यूडेंगा वैक्सीन शीशी और सिरिंज
डेंगू की नई वैक्सीन 'क्यूडेंगा', जो भारत में जल्द उपलब्ध होगी और डेंगू संक्रमण के खिलाफ प्रभावी सुरक्षा प्रदान करेगी।

अपनी भाषा में पढ़ें

New Delhi: देश में लंबे समय से गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बने डेंगू से बचाव के लिए एक नई उम्मीद सामने आई है। जापानी कंपनी टेकेडा फार्मास्युटिकल द्वारा विकसित ‘क्यूडेंगा’ (Qdenga) वैक्सीन को भारतीय बाजार में उतारने की तैयारी तेज हो गई है। इस वैक्सीन के प्रचार और वितरण के लिए टेकेडा ने दिग्गज भारतीय दवा निर्माता कंपनी डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज के साथ रणनीतिक साझेदारी की है। आवश्यक नियामकीय मंजूरियां और बाजार अनुमति मिलने के बाद इस टीके के वर्ष 2027 की पहली छमाही तक देश में उपलब्ध होने की पूरी उम्मीद है।

चारों सीरोटाइप पर असरदार और बिना पूर्व जांच के टीका

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, क्यूडेंगा को डेंगू वायरस के सभी चारों प्रमुख सीरोटाइप के खिलाफ प्रभावी सुरक्षा देने के लिए विकसित किया गया है। यह वैक्सीन 4 से लेकर 60 वर्ष तक की आयु के बच्चों और वयस्कों को दी जा सकती है। इसकी 0.5 मिलीलीटर की कुल दो खुराकें (डोज) निर्धारित हैं, जिसमें पहली खुराक लेने के ठीक तीन महीने बाद दूसरी खुराक लगाई जाती है। इस टीके की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे लगवाने से पहले व्यक्ति को यह जांचने की आवश्यकता नहीं है कि उसे पूर्व में कभी डेंगू हुआ था या नहीं। भारत के औषधि नियामक ने जुलाई 2026 में ही इस वैक्सीन को हरी झंडी दे दी थी।

90 फीसदी तक घटेगा अस्पताल में भर्ती होने का खतरा

क्लिनिकल परीक्षणों में इस टीके ने संक्रमण रोकने में काफी मजबूत नतीजे प्रदर्शित किए हैं। ट्रायल डेटा के मुताबिक, दूसरी खुराक लगने के एक साल बाद पुष्ट डेंगू मामलों में यह 80.2 प्रतिशत तक असरदार पाई गई। वहीं, दूसरी डोज के 18 महीने बाद डेंगू के चलते अस्पताल में भर्ती होने की नौबत में 90.4 प्रतिशत तक की भारी कमी दर्ज की गई है। हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि वैक्सीन एक अतिरिक्त रक्षा कवच जरूर बनेगी, लेकिन इसका यह अर्थ बिल्कुल नहीं है कि बुनियादी सतर्कता छोड़ दी जाए।

सावधानी और मच्छर नियंत्रण अब भी अनिवार्य

विशेषज्ञों के मुताबिक, टीकाकरण के बावजूद बारिश के मौसम में घर के आसपास पानी न जमने देना, मच्छरों के पनपने पर रोक लगाना, पूरी आस्तीन के कपड़े पहनना और मच्छरदानी व रिपेलेंट का उपयोग करना उतना ही जरूरी रहेगा। यह बीमारी मुख्य रूप से संक्रमित मादा एडीज मच्छर के काटने से फैलती है। वैक्सीन लगवाने से पहले प्रत्येक व्यक्ति को अपनी आयु, पुरानी बीमारियों और व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थिति के आधार पर योग्य चिकित्सक से परामर्श अवश्य लेना चाहिए।

WhatsApp Group जुड़ने के लिए क्लिक करें 👉 Join Now
Facebook
X
Threads
WhatsApp
Telegram