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स्तनपान कराने वाली महिलाओं में हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा 10 गुना कम!

शिशु के जन्म के शुरुआती 6 महीने तक स्तनपान कराने से जहां बच्चे को पोषण और संक्रमण से सुरक्षा मिलती है, वहीं मां के शरीर में मेटाबॉलिज्म तेज होने से हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा 10 गुना कम हो जाता है।
स्तनपान के फायदे

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Health Adda: शिशु के जन्म के बाद स्तनपान कराना केवल बच्चे के बेहतर स्वास्थ्य के लिए ही नहीं, बल्कि मां की शारीरिक सुरक्षा के लिए भी एक वरदान साबित होता है। जहां स्तनपान से नवजात शिशु गंभीर बीमारियों और बाहरी संक्रमणों से सुरक्षित रहते हैं और उन्हें संपूर्ण आहार मिलता है, वहीं यह मां को भी कई जानलेवा बीमारियों से बचाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, जन्म के शुरुआती 6 महीने तक नवजात को केवल मां का दूध पिलाना बेहद अनिवार्य है। इससे बच्चे को न सिर्फ आवश्यक पोषण प्राप्त होता है, बल्कि उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी मजबूत होती है।

हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा 10 गुना कम

स्तनपान कराने का लाभ सिर्फ शिशु तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह मां की सेहत पर भी गहरा सकारात्मक असर डालता है। एक नए चिकित्सीय अध्ययन के मुताबिक, जो महिलाएं अपने नवजात बच्चों को नियमित स्तनपान कराती हैं, उनमें हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक का खतरा अन्य महिलाओं की तुलना में 10 गुना तक कम हो जाता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि शिशु के जन्म के बाद स्तनपान कराने से मां के शरीर में मेटाबॉलिज्म तेजी से सक्रिय होता है, जो दिल से जुड़ी बीमारियों से बचाव का मुख्य कारण बनता है।

तेजी से घटता है गर्भावस्था में जमा अतिरिक्त फैट

अध्ययनकर्ताओं के अनुसार, गर्भावस्था के दौरान महिलाओं के शरीर में हार्मोनल और मेटाबॉलिक स्तर पर बड़े बदलाव आते हैं। इस दौरान शरीर बच्चे के समुचित विकास और उसे ऊर्जा देने के लिए भारी मात्रा में वसा (फैट) एकत्र कर लेता है। प्रसव के बाद ब्रेस्टफीडिंग इस जमा हुए अतिरिक्त फैट को तेजी से और पूरी तरह समाप्त करने में सबसे प्रभावी भूमिका निभाती है। इससे शरीर का वजन संतुलित होता है और महिला का शरीर प्रसव के बाद पुनः अपने पुराने और सामान्य आकार में तेजी से लौट आता है।

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