Health Adda: भारत समेत दुनिया के कई हिस्सों में सुपारी का इस्तेमाल सदियों से धार्मिक अनुष्ठानों, मुखवास और पारंपरिक खान-पान का अभिन्न हिस्सा रहा है। अधिक वर्षा और नम जलवायु वाले तटीय क्षेत्रों में बहुतायत से उगने वाला सुपारी का पेड़ आज वैश्विक स्तर पर करोड़ों लोगों की रोजमर्रा की आदत बन चुका है। विभिन्न संस्कृतियों में सुपारी का सेवन दो अलग-अलग वनस्पतियों (पान का पत्ता और सुपारी का बीज) के संयोजन के रूप में किया जाता है। आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा में इसे मन को प्रसन्न रखने, लार उत्पादन बढ़ाने तथा कफ और पित्त दोष को शांत करने वाला माना गया है। यहां तक कि कच्ची सुपारी को दूध में घिसकर पीने से पेट के हानिकारक कृमि (कीड़े) नष्ट होने का पारंपरिक नुस्खा भी काफी प्रचलित रहा है।
लार उत्पादन से ओरल कैंसर तक का सफर
आमतौर पर सुपारी चबाने से मुंह में अत्यधिक लार बनती है। उपभोक्ता इस अतिरिक्त लार को या तो बार-बार थूकते हैं या निगल लेते हैं। ऐतिहासिक रूप से इसे मौखिक स्वच्छता (ओरल हाइजीन), भूख बढ़ाने और पाचन को सुगम बनाने के लिए उपयोगी माना जाता था। हालांकि, आधुनिक चिकित्सा विज्ञान ने इसके चौंकाने वाले और जानलेवा दुष्प्रभाव उजागर किए हैं। ऑन्कोलॉजिस्ट्स और शोधकर्ताओं के अनुसार, सुपारी में मौजूद ‘एरेकोलीन’ जैसे हानिकारक एल्कलॉइड्स मुंह की अंदरूनी झिल्ली (म्यूकोसा) को गंभीर नुकसान पहुंचाते हैं। इससे मुंह के कैंसर (Oral Cancer) और ओरल सबम्यूकस फाइब्रोसिस (OSMF) का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है, जिससे मरीज का मुंह खुलना तक बंद हो जाता है।
गर्भस्थ शिशु के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव
वैज्ञानिक अनुसंधानों में यह भी स्पष्ट हुआ है कि सुपारी का दुष्प्रभाव केवल मुंह तक सीमित नहीं रहता। गर्भवती महिलाओं द्वारा सुपारी या पान-मसाले का सेवन अजन्मे शिशु के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत जोखिम भरा है। इसके विषाक्त तत्व गर्भनाल के जरिए भ्रूण तक पहुंचकर उसके सामान्य शारीरिक और मानसिक विकास को अवरुद्ध कर देते हैं। इससे जन्म के समय शिशु का वजन कम होना, समय पूर्व प्रसव (प्री-मेच्योर डिलीवरी) और नवजात में जन्मजात विकार होने की आशंका काफी बढ़ जाती है।
साइकोएक्टिव ड्रग का जाल और जागरूकता
सुपारी केवल एक माउथ फ्रेशनर नहीं, बल्कि एशियाई महाद्वीप, दक्षिण प्रशांत द्वीप समूह, दक्षिण-पूर्व एशिया, पाकिस्तान और बांग्लादेश में एक लोकप्रिय ‘साइकोएक्टिव ड्रग’ के रूप में इस्तेमाल की जाती है। यह केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को उत्तेजित कर एक छद्म स्फूर्ति का अहसास कराती है, जिससे लोग तेजी से इसके आदी हो जाते हैं। यद्यपि इसके कुछ औषधीय उपयोग गिनाए जाते रहे हैं, लेकिन चिकित्सकों का स्पष्ट मत है कि इसके जोखिम और नुकसान इसके किसी भी कथित लाभ से कहीं अधिक घातक हैं। मुंह के कैंसर से बचाव के लिए सुपारी के नियमित सेवन और इसकी लत से पूरी तरह बचना ही एकमात्र सुरक्षित मार्ग है।




