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जब डॉ. मनमोहन सिंह ने दो हफ्ते के फॉरेक्स रिजर्व वाले संकटग्रस्त भारत को बनाया आर्थिक महाशक्ति

जन्मदिन विशेष: आर्थिक उदारीकरण के प्रणेता डॉ. मनमोहन सिंह, जिन्होंने 1991 में बदल दी थी भारत की तकदीर

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Ranchi: 26 सितंबर1932 में अविभाजित भारत के पंजाब प्रांत में डॉ. मनमोहन सिंह का जन्म हुआ। एक साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर ब्रिटेन की प्रतिष्ठित कैम्ब्रिज और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से अर्थशास्त्र में उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले डॉ. सिंह का जीवन यह साबित करता है कि ज्ञान, सादगी और शांत नीतियां किसी भी राष्ट्र को बड़े से बड़े संकट से उबार सकती हैं। डॉ. मनमोहन सिंह केवल भारत के 14वें प्रधानमंत्री ही नहीं रहे, बल्कि वे भारतीय अर्थव्यवस्था को नए युग में ले जाने वाले मुख्य वास्तुकार (Architect) माने जाते हैं।

1991 का आर्थिक संकट और उदारीकरण का ऐतिहासिक बजट

वर्ष 1991 में भारत इतिहास के सबसे गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहा था। देश का विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserve) घटकर मात्र 1.2 अरब डॉलर के आसपास रह गया था, जो मुश्किल से दो हफ्तों के जरूरी आयात के लिए ही काफी था। देश दिवालिया होने की कगार पर खड़ा था।
ऐसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में तत्कालीन प्रधानमंत्री पी. वी. नरसिम्हा राव की सरकार में डॉ. मनमोहन सिंह ने वित्त मंत्री का पदभार संभाला। 24 जुलाई 1991 को पेश किए गए अपने ऐतिहासिक बजट भाषण में उन्होंने भारत के आर्थिक उदारीकरण का मार्ग प्रशस्त किया। इस नीति को LPG (Liberalization, Privatization, Globalization) यानी उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण के रूप में जाना जाता है।

1991 के सुधारों के प्रमुख प्रभाव:

  • लाइसेंस राज की समाप्ति: उद्योगों की स्थापना के लिए दशकों से चली आ रही जटिल प्रशासनिक बाधाओं और लाइसेंस राज को खत्म किया गया।
  • विदेशी निवेश (FDI) के दरवाजे खुले: भारतीय अर्थव्यवस्था को दुनिया के बाजारों से जोड़ा गया, जिससे देश में विदेशी निवेश का तेजी से आगमन हुआ।
  • निजी क्षेत्र को बढ़ावा: बैंकिंग, टेलीकॉम और विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में निजी और विदेशी कंपनियों को आने की अनुमति मिली, जिससे युवाओं के लिए रोजगार के लाखों नए अवसर पैदा हुए।

प्रधानमंत्रित्व काल (2004–2014): आर्थिक मजबूती और अधिकार-आधारित नीतियां

वर्ष 2004 में देश के प्रधानमंत्री का पद संभालने के बाद डॉ. मनमोहन सिंह ने 10 वर्षों तक देश का नेतृत्व किया। उनके कार्यकाल में भारत की औसत जीडीपी विकास दर 8 से 9 प्रतिशत के उच्च स्तर तक पहुंची। जब 2008 में पूरा विश्व मंदी (Global Financial Crisis) की चपेट में था, तब डॉ. सिंह की दूरदर्शी नीतियों के कारण ही भारतीय बैंकिंग तंत्र और अर्थव्यवस्था सुरक्षित रही।

उनके कार्यकाल में कई दूरगामी सामाजिक और विधिक सुधार लागू किए गए:

  1. मनरेगा (MGNREGA): ग्रामीण भारत में रोजगार की कानूनी गारंटी देकर करोड़ों परिवारों की आजीविका को सुरक्षा दी गई।
  2. सूचना का अधिकार (RTI Act 2005): शासन व्यवस्था में पारदर्शिता और नागरिकों को सशक्त बनाने के लिए ऐतिहासिक कानून पारित हुआ।
  3. शिक्षा का अधिकार (RTE Act): देश के हर बच्चे के लिए प्राथमिक शिक्षा को मौलिक अधिकार बनाया गया।
  4. भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौता (Civil Nuclear Deal): अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के परमाणु अलगाव को खत्म कर ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में एक नया दौर शुरू किया गया।
  5. आधार (Aadhaar): देश के हर नागरिक को डिजिटल पहचान देने वाले आधार प्रोजेक्ट की शुरुआत उन्हीं के समय में हुई।
मुख्य अर्थशास्त्री, आरबीआई गवर्नर, योजना आयोग के उपाध्यक्ष, वित्त मंत्री और प्रधानमंत्री के रूप में डॉ. मनमोहन सिंह की सेवाओं ने आधुनिक भारत की नींव को मजबूत किया है। उनके जन्मदिन पर पूरा देश उनके द्वारा दिखाए गए आर्थिक उदारीकरण के मार्ग और देश के विकास में दिए गए अद्वितीय योगदान को सम्मानपूर्वक नमन करता है।
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