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थानों में CCTV न लगाने पर झारखंड हाईकोर्ट सख्त, डीजीपी को नोटिस

झारखंड के थानों में सीसीटीवी नहीं लगाए जाने और हिरासत में 450 से अधिक मौतों पर हाईकोर्ट ने कड़ा संज्ञान लेते हुए मुख्य सचिव, गृह सचिव और डीजीपी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

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Ranchi: झारखंड के पुलिस थानों में अब तक CCTV कैमरे स्थापित नहीं किए जाने को लेकर झारखंड उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है। चीफ जस्टिस एमएस सोनक की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि इस घोर लापरवाही में राज्य के मुख्य सचिव, गृह सचिव और पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) के विरुद्ध सीधे तौर पर न्यायालय की अवमानना (Contempt of Court) का मामला बनता है। अदालत ने विधिवत अवमानना कार्रवाई शुरू करने से पहले राज्य के इन तीनों शीर्ष अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

450 कस्टोडियल मौतों पर नाराजगी

सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने बेहद तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि राज्य सरकार न्यायिक आदेशों का पालन करने के प्रति कतई गंभीर नहीं दिख रही है। कोर्ट ने रेखांकित किया कि साल 2018 के बाद से राज्य में पुलिस हिरासत में 450 से अधिक मौतें दर्ज हो चुकी हैं, इसके बावजूद थानों को तीसरी आंख की निगरानी में न लाना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक है। अदालत ने कहा कि हिरासत में मारपीट, बर्बरता और कस्टोडियल डेथ की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए कैमरों की मौजूदगी अनिवार्य है। सरकार द्वारा पेश हलफनामे में वास्तविक स्थिति छिपाने और टालमटोल भरा रवैया अपनाने पर कोर्ट ने भारी असंतोष जताया।

चार टेंडर फिर भी नतीजा सिफर

अदालत ने प्रक्रियात्मक शिथिलता पर सवाल उठाते हुए कहा कि थानों में CCTV लगाने के लिए अब तक चार बार टेंडर निकाले गए, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया। खंडपीठ ने डीजीपी के उस रुख पर भी कड़ी फटकार लगाई, जिसमें उन्होंने जिम्मेदारी को सीधे गृह विभाग पर टालने का प्रयास किया था। कोर्ट ने इसे शीर्ष पुलिस अधिकारी का गैर-जिम्मेदाराना आचरण करार दिया। मामले में अवमानना का औपचारिक केस दर्ज करने से पहले तीनों वरिष्ठ अफसरों को 15 अक्टूबर तक कारण बताओ नोटिस का बिंदुवार जवाब दाखिल करने का अंतिम निर्देश दिया गया है।

ईचागढ़ प्रत्याशी केस से खुला मामला

यह पूरा प्रकरण वर्ष 2024 के विधानसभा चुनाव में ईचागढ़ सीट से प्रत्याशी रहे तरुण महतो के साथ हुई कथित पुलिस प्रताड़ना से जुड़ा है। आरोप के मुताबिक, 19 नवंबर 2025 की रात पुलिस तरुण महतो को हिरासत में लेकर थाने गई थी, जहां उनके साथ गंभीर रूप से मारपीट और थर्ड डिग्री टॉर्चर किया गया। इस बर्बरता के खिलाफ पीड़ित की पत्नी ने झारखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को पत्र लिखकर न्याय की गुहार लगाई थी। उच्च न्यायालय ने इस शिकायती पत्र को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए स्वतः संज्ञान (Suo Motu) याचिका के रूप में दर्ज कर राज्यव्यापी स्तर पर थानों की कार्यप्रणाली की निगरानी शुरू की थी।

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