Bokaro: झारखंड आंदोलन के पुरोधा, महान समाज सुधारक एवं शिक्षाविद् स्वर्गीय बिनोद बिहारी महतो की जयंती के अवसर पर जनता दल (यूनाइटेड), बोकारो जिला की ओर से श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का नेतृत्व जदयू बोकारो जिलाध्यक्ष प्रदीप महतो ने किया। इस अवसर पर उपस्थित नेताओं एवं कार्यकर्ताओं ने स्व. बिनोद बिहारी महतो की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया।
इस अवसर पर जदयू झारखंड प्रदेश सचिव मनोज कुमार सिंह सहित पार्टी के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे। वक्ताओं ने कहा कि बिनोद बाबू ने शिक्षा, सामाजिक जागरूकता, जनअधिकार और झारखंड के हितों के लिए अपना जीवन समर्पित किया। उनके विचार और संघर्ष आज भी समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं।
जिलाध्यक्ष प्रदीप महतो ने राज्य सरकार, माननीय राज्यपाल, मुख्यमंत्री एवं जिला प्रशासन से मांग की कि बोकारो हवाई अड्डे का नामकरण स्वर्गीय बिनोद बिहारी महतो के नाम पर किया जाए। उन्होंने कहा कि बिनोद बाबू के योगदान को देखते हुए यह उनके प्रति सम्मान की सार्थक अभिव्यक्ति होगी।
उन्होंने यह भी मांग की कि बिनोद बिहारी महतो की जयंती 23 सितंबर को राज्य में एक दिवसीय अवकाश घोषित करने की दिशा में राज्य सरकार आवश्यक पहल करे, ताकि उनकी जयंती व्यापक रूप से मनाई जा सके और युवा पीढ़ी उनके संघर्ष एवं विचारों से परिचित हो।
इसके साथ ही जिलाध्यक्ष ने राज्य सरकार, जिला प्रशासन तथा बोकारो प्रबंधन से मांग की कि बोकारो हवाई अड्डा परिसर के अंतर्गत स्वर्गीय बिनोद बिहारी महतो की एक भव्य प्रतिमा स्थापित की जाए। उन्होंने कहा कि हवाई अड्डे के परिसर में उनकी प्रतिमा स्थापित होने से यह स्थान बिनोद बाबू के योगदान और झारखंड के इतिहास की स्मृति का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकेगा। इस दिशा में राज्य सरकार, जिला प्रशासन एवं बोकारो प्रबंधन समन्वय के साथ आवश्यक पहल करे।
कार्यक्रम में जदयू बोकारो जिला उपाध्यक्ष श्री राजा पांडेय, झारखंड विस्थापित मंच के केंद्रीय अध्यक्ष सह अधिवक्ता वकील महतो, उपाध्यक्ष रज्जाक अंसारी, रतनलाल महतो, जिला कार्यकारिणी सदस्य कृष्णा सिंह, चंडी कुमार प्रजापति, महाराजा पांडेय, आनंद मोहन सिंह, सूरज पांडेय, सुधीर यादव, शिवम पांडेय, आदित्य यादव, विशाल यादव, आशीष शर्मा, उपेंद्र कुमार महतो सहित अन्य कार्यकर्ता उपस्थित रहे।अंत में सभी उपस्थित नेताओं एवं कार्यकर्ताओं ने बिनोद बाबू के बताए मार्ग पर चलने तथा उनके सामाजिक एवं शैक्षणिक विचारों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।




