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सनातन धर्म में सप्ताह का हर दिन है किसी न किसी भगवान को समर्पित

सनातन परंपरा में बुधवार का दिन प्रथम पूज्य गणेश जी और नवग्रहों में शामिल बुध देव को समर्पित है; जानिए बुधवार व्रत की पौराणिक कथा, पूजा विधि और गमन से जुड़े नियम।

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Spiritual Adda: सनातन धर्म में सप्ताह का प्रत्येक वार किसी न किसी देवी-देवता और नवग्रहों की आराधना के लिए निर्धारित है। जिस प्रकार सोमवार भगवान शिव और मंगलवार संकटमोचन हनुमान जी की उपासना के लिए श्रेष्ठ माना गया है, उसी तरह बुधवार का दिन बुद्धि के दाता भगवान श्री गणेश और ग्रहों के राजकुमार बुध देव को समर्पित है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, बुधवार के दिन व्रत रखने और विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने से कुंडली में बुध ग्रह की स्थिति मजबूत होती है तथा व्यापार, विद्या और पारिवारिक जीवन में सुख-समृद्धि आती है। इस व्रत के दौरान पौराणिक कथा का श्रवण करना अनिवार्य माना गया है।

सप्ताह के सातों दिन और उनके समर्पित देवी-देवता

  • सोमवार (Monday) — भगवान शिव:

    यह दिन देवों के देव महादेव यानी भगवान शिव को समर्पित है। इस दिन शिवलिंग पर जल, कच्चा दूध और बेलपत्र अर्पित कर ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करने से मानसिक शांति मिलती है और चंद्र दोष दूर होता है।

  • मंगलवार (Tuesday) — हनुमान जी और मंगल देव:

    मंगलवार का दिन संकटमोचन हनुमान जी की उपासना का दिन है। इस दिन हनुमान चालीसा या सुंदरकांड का पाठ करने, सिंदूर व चमेली का तेल चढ़ाने से भय, संकट और मांगलिक दोषों से मुक्ति मिलती है।

  • बुधवार (Wednesday) — भगवान श्री गणेश और बुध देव:

    बुद्धि और विवेक के दाता प्रथम पूज्य भगवान गणेश की पूजा बुधवार को की जाती है। गणेश जी को दूर्वा, मोदक या लड्डू अर्पित करने और बुध देव के निमित्त हरे रंग की वस्तुओं का दान करने से व्यापार, शिक्षा और करियर में तरक्की होती है।

  • गुरुवार (Thursday) — भगवान श्रीहरि विष्णु और बृहस्पति देव:

    यह दिन जगत के पालनहार भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति को समर्पित है। इस दिन पीले वस्त्र धारण कर केले के पेड़ की पूजा करने, चने की दाल-गुड़ अर्पित करने से सुख, सौभाग्य, विद्या और वैवाहिक जीवन में अनुकूलता आती है।

  • शुक्रवार (Friday) — मां लक्ष्मी, संतोषी माता और शुक्र देव:

    शुक्रवार का दिन धन, ऐश्वर्य और वैभव की देवी मां लक्ष्मी और आदिशक्ति दुर्गा के स्वरूपों को समर्पित है। इस दिन खीर का भोग लगाने और श्री सूक्त का पाठ करने से घर में दरिद्रता का नाश होता है और सुख-समृद्धि बढ़ती है।

  • शनिवार (Saturday) — शनि देव और भैरव बाबा:

    न्याय के देवता शनि देव और काल भैरव की आराधना शनिवार को की जाती है। इस दिन पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाने, काले तिल और उड़द का दान करने से शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या और कष्टों से राहत मिलती है।

  • रविवार (Sunday) — सूर्य देव:

    सप्ताह का अंतिम दिन प्रत्यक्ष देवता भगवान सूर्य नारायण को समर्पित है। तांबे के लोटे में रोली, अक्षत और लाल पुष्प डालकर सूर्य देव को अर्घ्य देने तथा ‘ॐ सूर्याय नमः’ या आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करने से मान-सम्मान, तेज, स्वास्थ्य और यश में वृद्धि होती है।

ससुराल से विदाई और रथ में बैठे हमशक्ल की पौराणिक कथा

प्रचलित पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन काल में एक व्यक्ति अपनी पत्नी को विदा कराने के लिए ससुराल पहुंचा। कुछ दिन वहां ठहरने के बाद उसने सास-ससुर से पत्नी को विदा करने का आग्रह किया। ससुराल पक्ष के लोगों ने उसे समझाया कि आज बुधवार है और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन उत्तर या पश्चिम दिशा में यात्रा तथा कन्या की विदाई (गमन) नहीं की जाती। युवक ने उनकी सलाह को अंधविश्वास मानकर नकार दिया और जिद पर अड़ गया। विवश होकर माता-पिता ने अपनी बेटी को दामाद के साथ विदा कर दिया।

मार्ग में घने जंगल से गुजरते समय पत्नी को तीव्र प्यास लगी। पति ने रथ रोककर पत्नी के लिए पानी की तलाश में वन की ओर रुख किया। कुछ देर बाद जब वह जल लेकर लौटा, तो रथ का दृश्य देखकर उसके होश उड़ गए। ठीक उसके जैसे रूप-रंग और वस्त्र धारण किए हुए एक अन्य व्यक्ति उसकी पत्नी के पास रथ पर बैठा था।

विवाद, बंदी बनाए जाने और आकाशवाणी से खुला रहस्य

युवक ने क्रोधित होकर पूछा कि वह कौन है और उसकी पत्नी के पास क्यों बैठा है। इस पर दूसरे व्यक्ति ने शांत भाव से कहा कि वह ही असली पति है और अपनी पत्नी को ससुराल से विदा कराकर ला रहा है। दोनों के बीच तीखी झड़प और हाथापाई शुरू हो गई। विवाद इतना बढ़ा कि राज्य के पहरेदारों ने दोनों को पकड़कर बंदी बना लिया। असहाय और अपमानित होकर युवक ने भगवान से न्याय की गुहार लगाई कि जो सत्य है उसे झूठा साबित किया जा रहा है।

तभी आकाशवाणी गूंजी—”हे अज्ञानी, आज बुधवार का दिन था और तूने बड़े-बुजुर्गों की बात न मानकर बुधवार को गमन किया। यह सब बुध देव के प्रभाव और तेरे अहंकार का परिणाम है।” युवक को अपनी भूल का भान हुआ और उसने हाथ जोड़कर बुध देव से क्षमा मांगी। इसके बाद दूसरा व्यक्ति अंतर्धान हो गया और दांपत्य जीवन में शांति लौटी।

नए कार्य के शुभारंभ और यात्रा दोष से मुक्ति के नियम

इस घटना के उपरांत दोनों पति-पत्नी ने प्रत्येक बुधवार को नियमपूर्वक व्रत रखना और बुध देव व गणेश जी की आराधना करना आरंभ किया। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जो साधक बुधवार व्रत की इस कथा को नियमित पढ़ता या सुनता है, उसे यात्रा में किसी अनिष्ट या दोष का सामना नहीं करना पड़ता। इसके अलावा बुधवार को किसी नए व्यापार, गृह निर्माण, शिक्षा आरंभ या वित्तीय लेनदेन की शुरुआत करना अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है, क्योंकि बुध ग्रह वाणिज्य और विवेक के कारक हैं।

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