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जीविका ने बदली तकदीर: कभी दाने-दाने की फिक्र, आज दूसरों को दे रहीं रोजगार

बिहार में जीविका सहायता समूह और महिला स्वरोजगार योजनाओं से जुड़कर ग्रामीण महिलाएं आर्थिक तंगी को पीछे छोड़ कोचिंग, ब्यूटी पार्लर और आधुनिक खेती के जरिए लाखों की कमाई कर रही हैं।

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Patna: ग्रामीण इलाकों में आर्थिक तंगी और सीमित अवसरों के बीच संघर्ष करने वाली महिलाएं अब जीविका और महिला स्वरोजगार योजनाओं के दम पर आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिख रही हैं। कभी दो वक्त के भोजन के लिए दूसरों पर निर्भर रहने वाली ये महिलाएं आज न केवल अपने परिवारों को आर्थिक संकट से बाहर निकाल रही हैं, बल्कि अन्य लोगों को भी रोजगार मुहैया करा रही हैं। मुजफ्फरपुर से लेकर बांका तक, छोटे-छोटे ऋण और सही मार्गदर्शन ने इन महिलाओं की जिंदगी की दिशा पूरी तरह बदल दी है।

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50 हजार के लोन से शुरू किया सफर, आज स्कूल चलाकर कमा रहीं 1.25 लाख

प्रतीक्षा कुमारी, जीविका दीदी

मुजफ्फरपुर जिले के जमालपुर गांव की निवासी जीविका दीदी प्रतीक्षा कुमारी बचपन से ही शिक्षिका बनकर गांव के बच्चों को शिक्षित करने का सपना देखती थीं, लेकिन पारिवारिक गरीबी हमेशा उनके आड़े आती रही। जीविका सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें 50 हजार रुपये का शुरुआती ऋण मिला, जिससे उन्होंने गांव में एक छोटा कोचिंग सेंटर शुरू किया। उनकी लगन और सेंटर की लोकप्रियता को देखते हुए जीविका ने उन्हें एक लाख रुपये का अतिरिक्त ऋण दिया। इस पूंजी से प्रतीक्षा ने अपने स्कूल की नींव रखी। आज उनके स्कूल में छह शिक्षक व कर्मी कार्यरत हैं और वह प्रतिमाह करीब 1.25 लाख रुपये की नियमित आय अर्जित कर रही हैं।

10 हजार रुपये के ऋण से अनू देवी ने संवारी परिवार की आजीविका

अन्नू देवी, जीविका दीदी

मुजफ्फरपुर के ही गायघाट प्रखंड की रहने वाली अनू देवी के परिवार पर महीनों तक भारी आर्थिक तंगी का साया रहा। रोजमर्रा के खर्च चलाना मुश्किल हो रहा था। ऐसे संकट के समय उन्होंने महिला स्वरोजगार योजना के तहत 10 हजार रुपये का छोटा ऋण प्राप्त किया और गांव में खुद का ब्यूटी पार्लर शुरू किया। इस छोटे से प्रयास ने धीरे-धीरे रफ्तार पकड़ी और आज उनका पार्लर बेहतर मुनाफा दे रहा है। अनू देवी का कहना है कि समय पर मिले इस वित्तीय सहारे ने उनके पूरे परिवार को आर्थिक बदहाली से उबारकर खुशहाली की राह पर ला खड़ा किया।

बांका की रिंकू बनीं राष्ट्रीय रोल मॉडल, मशरूम और शहद से कमाई

अन्नू देवी, जीविका दीदी

बांका जिले के झिरवां प्रखंड की रिंकू देवी ने आधुनिक खेती को अपनी ताकत बनाकर देशव्यापी पहचान कायम की है। उन्होंने पारंपरिक खेती के बंधनों से बाहर निकलकर मशरूम उत्पादन और मधुमक्खी पालन को बड़े पैमाने पर अपनाया। रिंकू को वर्ष 2016 में प्रोग्रेसिव वुमेन फार्मर सम्मान और वर्ष 2018 में नई दिल्ली के पूसा संस्थान में प्रतिष्ठित ‘जगजीवन राम अवार्ड’ के अलावा मंदार महोत्सव सम्मान से नवाजा जा चुका है। आज वह न सिर्फ सफल कृषि उद्यमी हैं, बल्कि राज्य के विभिन्न जिलों की सैकड़ों महिलाओं को मशरूम की वैज्ञानिक खेती और शहद उत्पादन का व्यावहारिक प्रशिक्षण देकर उन्हें स्वावलंबी बना रही हैं।

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