रांची : झारखंड समेत बिहार, छत्तीसगढ़ और ओडिशा के कई इलाकों में मनाया जाने वाला करमा पर्व इस साल 22 सितंबर 2026, मंगलवार को मनाया जाएगा। यह पर्व प्रकृति, खेती-किसानी और भाई-बहन के प्रेम से जुड़ा है। करमा पर्व को लेकर झारखंड के गांवों और आदिवासी इलाकों में उत्साह का माहौल है।
करमा पूजा की तैयारियां कई दिन पहले से शुरू हो जाती हैं। लोग घर और आंगन की सफाई करते हैं और पूजा स्थल को सजाते हैं। महिलाएं और युवतियां पूजा की तैयारी में जुटी हैं। इस पर्व में जावा का विशेष महत्व है। कई जगहों पर करम पेड़ की डाल लाकर उसकी पूजा करने की भी परंपरा है।
पूजा के दौरान करमा-धरमा की कथा सुनने की परंपरा है। लोग करम देवता की पूजा कर परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और अच्छी फसल की कामना करते हैं। किसान समुदाय के लिए यह पर्व खेती और अच्छी फसल की उम्मीद से भी जुड़ा है।
करमा पर्व को भाई-बहन के प्रेम का त्योहार भी माना जाता है। कई जगहों पर बहनें अपने भाइयों की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। परिवार के लोग मिलकर पूजा करते हैं और पारंपरिक गीत व नृत्य का आयोजन भी होता है।
करमा पर्व की खासियत इसका प्रकृति से जुड़ाव है। करम वृक्ष, मिट्टी, फसल और हरियाली को इस पर्व में विशेष महत्व दिया जाता है। पर्व लोगों को प्रकृति और पर्यावरण के प्रति सम्मान का संदेश भी देता है।
राजधानी रांची में भी करमा पर्व को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं। विभिन्न अखड़ों की साफ-सफाई और रंग-रोगन का काम चल रहा है। पूजा स्थलों को सजाया जा रहा है। पर्व को लेकर लोगों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है।




