Patna: बिहार के 15 जिलों में बाढ़ प्रभावित रहने की गंभीर स्थिति के बीच कुछ राहत भरी खबरें सामने आई हैं। राज्य के कुछ स्थानों पर गंगा और सोन जैसी प्रमुख नदियों का पानी घटने लगा है, जबकि कोसी और गंडक का पानी भी कई स्थानों पर स्थिर बताया जा रहा है।
नदियों के जलस्तर में उतार-चढ़ाव
आपदा प्रबंधन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, भागलपुर के सुल्तानगंज में गंगा नदी और इंद्रपुरी बराज पर सोन नदी का पानी घटने की ओर अग्रसर है। इसके अलावा, बाल्मीकिनगर बराज पर गंडक और वीरपुर बराज पर कोसी नदी का जलस्तर स्थिर बना हुआ है, जिससे बाढ़ की विभीषिका से जल्द राहत मिलने की उम्मीद जगी है। हालांकि, डुमरिया घाट पर गंडक, बलतारा एवं कुर्सेला में कोसी, खगड़िया में बूढ़ी गंडक, दीघा, गांधीघाट, हाथीदह, भागलपुर, कहलगांव एवं मुंगेर में गंगा, श्रीपालपुर में पुनपुन, बेनीबाद में बागमती और दरौली एवं सिसवन में घाघरा नदी अभी भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं।
प्रभावित जिले और राहत कार्य
राज्य के 15 जिलों—पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय, खगड़िया, पूर्णिया, मधेपुरा और अरवल के 87 प्रखंडों के 575 गांवों के लगभग 47.92 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। इन सभी जिलों में राहत और बचाव कार्य युद्धस्तर पर चलाए जा रहे हैं।
भोजन और चिकित्सा की व्यवस्था
आंकड़ों के मुताबिक, राज्यभर में संचालित 1245 कम्युनिटी किचन के माध्यम से अब तक 73.30 लाख बाढ़ पीड़ितों को भोजन कराया जा चुका है। इसके साथ ही 13 राहत शिविरों के जरिए 12,260 लोगों को आवास, भोजन और चिकित्सा सुविधाएं दी जा रही हैं। राहत सामग्री के रूप में लगभग 3.50 लाख पॉलीथीन शीट, 57,100 ड्राई राशन पैकेट, 1400 फूड पैकेट और 11,204 क्विंटल पशुचारा वितरित किया जा चुका है। आवागमन को सुगम बनाने के लिए 1840 सरकारी नावें चलाई जा रही हैं, जबकि एनडीआरएफ की 10 और एसडीआरएफ की 27 टीमें सुरक्षा और बचाव कार्य में तैनात हैं।




