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सुंदरम स्टील की लोक सुनवाई का विरोध, ग्रामीणों ने उठाए सवाल

Bokaro : सुंदरम स्टील प्राइवेट लिमिटेड के विस्तारीकरण एवं नए फेरो अलॉय प्लांट की स्थापना को लेकर आयोजित पर्यावरणीय लोक सुनवाई का ग्रामीणों ने जोरदार विरोध किया। ग्रामीणों का आरोप है कि जिस क्षेत्र के लोग कंपनी के विस्तार और उससे होने वाले प्रदूषण से

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Bokaro : सुंदरम स्टील प्राइवेट लिमिटेड के विस्तारीकरण एवं नए फेरो अलॉय प्लांट की स्थापना को लेकर आयोजित पर्यावरणीय लोक सुनवाई का ग्रामीणों ने जोरदार विरोध किया। ग्रामीणों का आरोप है कि जिस क्षेत्र के लोग कंपनी के विस्तार और उससे होने वाले प्रदूषण से सीधे प्रभावित होंगे, वहां लोक सुनवाई आयोजित नहीं कराकर बियाडा भवन में कार्यक्रम आयोजित किया गया, जो लोक सुनवाई की प्रक्रिया एवं प्रभावित ग्रामीणों की वास्तविक भागीदारी को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।

ग्रामीणों ने कहा कि कंपनी के विस्तार से आसपास के गांवों पर प्रदूषण, जल स्रोत, कृषि भूमि, स्वास्थ्य एवं पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर पहले से ही चिंता बनी हुई है। ऐसे में प्रभावित क्षेत्र के ग्रामीणों की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित किए बिना लोक सुनवाई कराना उचित नहीं है।

मौके पर आजसू पार्टी बोकारो जिलाध्यक्ष सचिन महतो ने कहा कि सुंदरम स्टील क्षेत्र में प्रदूषण को लेकर लगातार शिकायतें सामने आती रही हैं। कंपनी के विस्तारीकरण से पहले वर्तमान प्रदूषण की स्थिति, प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्था तथा स्थानीय लोगों पर पड़ रहे प्रभाव का निष्पक्ष आकलन आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि “स्थानीय लोगों को कंपनी में स्थायी और सम्मानजनक रोजगार देने के बजाय अक्सर लेबर और कुली जैसे कार्यों तक सीमित रखा जाता है। कंपनी के विस्तारीकरण से स्थानीय लोगों को वास्तविक लाभ और रोजगार का अधिकार मिलना चाहिए।”

सचिन महतो ने CSR के मुद्दे पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि कंपनी को अपने CSR फंड के खर्च का पूरा विवरण सार्वजनिक करना चाहिए। किन गांवों में कितना पैसा खर्च किया गया, किन योजनाओं पर खर्च हुआ और उसका वास्तविक लाभ कितने स्थानीय लोगों को मिला—इसकी सार्वजनिक जानकारी ग्रामीणों के सामने रखी जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि कंपनी के विस्तार से पहले पर्यावरणीय प्रभाव, प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों की क्षमता, उत्सर्जन एवं अपशिष्ट प्रबंधन, जल स्रोतों की सुरक्षा, स्थानीय रोजगार तथा CSR की स्थिति पर स्पष्ट जवाब देना होगा।

आजसू जिलाध्यक्ष ने मांग की कि लोक सुनवाई की पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए और प्रभावित गांवों के ग्रामीणों को उनकी भाषा में परियोजना से संबंधित सभी जानकारी उपलब्ध कराई जाए। साथ ही, ग्रामीणों की आपत्तियों एवं सुझावों को रिकॉर्ड में शामिल करते हुए नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाए।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि “विकास के नाम पर ग्रामीणों के स्वास्थ्य, पर्यावरण और अधिकारों से समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। कंपनी को विस्तार चाहिए तो पहले स्थानीय लोगों का विश्वास और पर्यावरणीय सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी।”

ग्रामीणों ने भी मांग की कि परियोजना से संबंधित सभी पर्यावरणीय दस्तावेज, प्रदूषण नियंत्रण की रिपोर्ट, CSR खर्च का विवरण तथा रोजगार से संबंधित जानकारी सार्वजनिक की जाए और प्रभावित ग्रामीणों की आपत्तियों का समाधान किए बिना विस्तारीकरण की प्रक्रिया आगे न बढ़ाई जाए।

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