गिरिडीह: सीसीएल की कबरीबाद माइंस से सटे चिलगा गांव के लोगों की मुश्किलें लगातार बढ़ रही हैं। गांव के आसपास जमीन धंसने की घटनाएं ग्रामीणों को डराने लगी हैं। वहीं, माइंस में होने वाली तेज ब्लास्टिंग के दौरान पत्थर उछलकर घरों तक पहुंच रहे हैं। इससे लोगों को हर समय हादसे का डर बना रहता है।
ग्रामीणों के अनुसार, गांव के पास पथ निर्माण विभाग की सड़क के किनारे अक्सर जमीन धंसने से गहरे गड्ढे बन जाते हैं। ब्लास्टिंग के कंपन का असर भी आसपास के घरों पर पड़ रहा है। कई मकानों की दीवारों में दरारें दिखाई देने लगी हैं।
ब्लास्टिंग के दौरान घर पर गिरा पत्थर
ग्रामीण टिंकू यादव ने बताया कि दो दिन पहले ब्लास्टिंग के दौरान एक बड़ा पत्थर उनके घर पर आ गिरा। संयोग से उस समय कोई व्यक्ति उसकी चपेट में नहीं आया। मनोज यादव ने बताया कि ब्लास्टिंग से उड़ा पत्थर उनके घर पर गिरा था। इस दौरान उनकी पत्नी बाल-बाल बचीं।
अजीत कुमार यादव ने बताया कि माइंस के कारण उनके पिता की जान जा चुकी है। उनका कहना है कि इसके बाद भी ग्रामीणों की सुरक्षा और सुविधाओं को लेकर पर्याप्त काम नहीं हुआ। ग्रामीण सूरज यादव ने मांग की कि ब्लास्टिंग के दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं, ताकि लोगों की जान और घर दोनों सुरक्षित रहें।
प्रबंधन बोला- सुरक्षा नियमों का होता है पालन
कबरीबाद माइंस के ब्लास्टिंग इंचार्ज संजीव कुमार ने कहा कि ब्लास्टिंग से पहले सायरन बजाया जाता है। सड़क के आसपास सुरक्षा गार्ड तैनात किए जाते हैं और क्षेत्र में निगरानी भी की जाती है।
उन्होंने बताया कि दो दिन पहले ब्लास्टिंग के दौरान एक-दो पत्थर गांव की ओर छिटक गए थे। उनके अनुसार, बारिश के कारण ऐसा हुआ। उन्होंने कहा कि माइंस में ब्लास्टिंग तय नियमों के अनुसार ही की जाती है।
अवैध खनन से जमीन खोखली होने का आरोप
ग्रामीणों का कहना है कि इलाके में लंबे समय से अवैध खनन के कारण जमीन अंदर से कमजोर हो गई है। आरोप है कि जमीन के नीचे कई जगह अवैध सुरंगें बनाई गई हैं। बारिश के बाद इन जगहों पर जमीन धंसने का खतरा और बढ़ जाता है।
ग्रामीणों ने प्रशासन और सीसीएल प्रबंधन से जमीन धंसने की घटनाओं की जांच कराने, अवैध खनन पर रोक लगाने और ब्लास्टिंग से होने वाले खतरे को कम करने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है।




