Patna/New Delhi: राष्ट्रीय शैक्षिक योजना एवं प्रशासन संस्थान (NIEPA), नई दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय परामर्शी बैठक में बिहार की उच्च शिक्षा में हो रहे ऐतिहासिक सुधारों और नवाचारों को प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया। ‘इम्प्लीमेंटेशन ऑफ एनईपी 2020 – स्ट्रेंथनिंग स्टेट सिस्टम थ्रू एबीसी, एमईएमई, आरपीएल एंड इनक्लूजन’ विषय पर आयोजित इस राष्ट्रीय सम्मेलन में विभिन्न राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की उच्च शिक्षा परिषदों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
इस बैठक में बिहार का प्रतिनिधित्व करते हुए ‘बिहार राज्य उच्च शिक्षा परिषद’ के उपाध्यक्ष प्रो. डॉ. एनके अग्रवाल ने राज्य में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के प्रभावी क्रियान्वयन और संस्थागत बदलावों का विस्तृत ब्योरा रखा।
एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स और अप्रेंटिसशिप एम्बेडेड डिग्री
प्रो. अग्रवाल ने बताया कि बिहार में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रमुख प्रावधानों को तेजी से जमीन पर उतारा जा रहा है:
एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स (ABC) व MEME: विद्यार्थियों को अपनी पढ़ाई के दौरान ‘मल्टीपल एंट्री एंड मल्टीपल एग्जिट’ (MEME) और पूर्व सीखने की मान्यता (RPL) की सुगम सुविधा दी जा रही है।
अप्रेंटिसशिप एम्बेडेड डिग्री: राज्य में ऐसे डिग्री प्रोग्राम शुरू किए जा रहे हैं जहाँ विद्यार्थियों को क्लासरूम थ्योरी के साथ-साथ वास्तविक कार्यस्थलों पर व्यावहारिक प्रशिक्षण और कार्यानुभव प्राप्त होगा, जिससे उनकी रोजगार क्षमता (Employability) में इजाफा हो सके।
दूर-दराज के इलाकों में 211 नए राजकीय डिग्री कॉलेज स्थापित
उच्च शिक्षा की पहुंच ग्रामीण और सुदूरवर्ती क्षेत्रों तक सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार ने बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे का विस्तार किया है।
211 नए डिग्री कॉलेज: राज्य सरकार द्वारा 211 नए राजकीय डिग्री महाविद्यालयों की स्थापना की गई है।
छात्राओं को सीधा लाभ: इन कॉलेजों के खुलने से उन क्षेत्रों के छात्र-छात्राओं को लाभ मिला है, जिन्हें डिग्री स्तर की शिक्षा के लिए पहले मीलों दूर जाना पड़ता था। विशेष रूप से ग्रामीण छात्राओं के लिए स्थानीय स्तर पर उच्च शिक्षा के दरवाजे खुले हैं।
गुणवत्ता, समावेशन और शोध पर विशेष जोर
प्रो. अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि बिहार में उच्च शिक्षा का विस्तार केवल संस्थानों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि गुणवत्ता, समान अवसर, डिजिटल शिक्षा, शोध, नवाचार और रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रमों पर समान जोर दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर राज्यों के अनुभवों के आदान-प्रदान से बिहार उच्च शिक्षा में नए मानक स्थापित कर रहा है।




