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झारखंड के खनिज राजस्व पर गरमाई सियासत, कुणाल ने दी बड़ी चेतावनी

Jamshedpur news: झामुमो के केंद्रीय प्रवक्ता सह पूर्व विधायक कुणाल षाड़ंगी ने झारखंड के खनिज और वित्तीय अधिकारों को लेकर केंद्र सरकार पर जोरदार हमला बोला है। रविवार को बिष्टुपुर स्थित परिसदन में उन्होंने कहा कि झारखंड की धरती से निकलने वाले खनिज देश के

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Jamshedpur news: झामुमो के केंद्रीय प्रवक्ता सह पूर्व विधायक कुणाल षाड़ंगी ने झारखंड के खनिज और वित्तीय अधिकारों को लेकर केंद्र सरकार पर जोरदार हमला बोला है। रविवार को बिष्टुपुर स्थित परिसदन में उन्होंने कहा कि झारखंड की धरती से निकलने वाले खनिज देश के औद्योगिक विकास में बड़ा योगदान देते हैं, लेकिन खनन से होने वाले विस्थापन, प्रदूषण और पर्यावरणीय नुकसान का खामियाजा राज्य की जनता को भुगतना पड़ता है। ऐसे में खनिज राजस्व से जुड़े राज्य के अधिकारों को सीमित करना झारखंड के साथ आर्थिक अन्याय है।

कुणाल षाड़ंगी ने माइंस एंड मिनरल्स डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन संशोधन कानून 2026 को लेकर केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि नए प्रावधानों से राज्यों की खनिज युक्त भूमि पर कर, उपकर और अन्य लेवी लगाने की शक्तियां प्रभावित हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार इस बदलाव का विरोध कर रही है और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी केंद्र से कानून पर पुनर्विचार की मांग कर चुके हैं।

उन्होंने जुलाई 2024 के सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि खनिज युक्त भूमि को भूमि की श्रेणी में माना गया है। इसके बाद झारखंड विधानसभा ने मिनरल बेयरिंग लैंड सेस कानून पारित किया। षाड़ंगी ने कहा कि राज्य के संवैधानिक अधिकारों और वित्तीय स्वायत्तता को कमजोर करने का कोई भी प्रयास स्वीकार नहीं किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि खनिज वहन भूमि सेस से राज्य को मिलने वाला राजस्व झारखंड के विकास के लिए महत्वपूर्ण है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 2024-25 में करीब 1379 करोड़, 2025-26 में लगभग 7488 करोड़ और 2026-27 में करीब 13215 करोड़ रुपये राजस्व का अनुमान लगाया गया है। इस राशि का इस्तेमाल शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, ग्रामीण विकास, सामाजिक सुरक्षा और खनन प्रभावित लोगों के पुनर्वास में किया जा सकता है।

कुणाल षाड़ंगी ने कहा कि खनिज संपदा झारखंड की जमीन से निकलती है, इसलिए उससे जुड़े आर्थिक फैसलों में राज्य के हितों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि खनन से विस्थापन, जल और वायु प्रदूषण, वन क्षेत्र पर दबाव तथा स्थानीय आधारभूत सुविधाओं पर अतिरिक्त बोझ बढ़ता है। ऐसे में खनिज राजस्व का बड़ा हिस्सा प्रभावित क्षेत्रों के विकास पर खर्च होना चाहिए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर राजनीतिक कटाक्ष करते हुए कुणाल षाड़ंगी ने उनकी तस्वीर वाले पोस्टर का इस्तेमाल किया और केंद्र की नीतियों पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि झारखंड के खनिज संसाधनों से देश को लाभ पहुंचता है, लेकिन राज्य के अधिकारों और जनता के हितों की अनदेखी नहीं की जा सकती। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री को लेकर व्यंग्यात्मक टिप्पणी भी की।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि झामुमो फिलहाल लोकतांत्रिक तरीके से इस मुद्दे को उठा रहा है। यदि केंद्र सरकार ने झारखंड के खनिज और राजस्व अधिकारों पर पुनर्विचार नहीं किया तो आंदोलन को व्यापक रूप दिया जाएगा और इसे जिलों से लेकर प्रखंड तथा पंचायत स्तर तक ले जाया जाएगा।

कुणाल षाड़ंगी ने केंद्र सरकार से राज्यों के साथ व्यापक विचार-विमर्श करने और खनिज उत्पादक राज्यों के वित्तीय हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि झारखंड अपने प्राकृतिक संसाधनों के इस्तेमाल के खिलाफ नहीं है, लेकिन राज्य के संवैधानिक और आर्थिक अधिकारों की कीमत पर कोई व्यवस्था स्वीकार नहीं की जाएगी।

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