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सहारा समूह की समिति को झटका, 3.63 लाख के बदले मिलेंगे 5.85 लाख

Chaibasa news: पश्चिमी सिंहभूम जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने सहारा समूह से संबद्ध हमारा इंडिया क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड के खिलाफ दायर उपभोक्ता मामले में गुरुवार को शिकायतकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाया है। आयोग ने सेवा में कमी और उपभोक्ता के प्रति लापरवाही

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Chaibasa news: पश्चिमी सिंहभूम जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने सहारा समूह से संबद्ध हमारा इंडिया क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड के खिलाफ दायर उपभोक्ता मामले में गुरुवार को शिकायतकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाया है। आयोग ने सेवा में कमी और उपभोक्ता के प्रति लापरवाही को जिम्मेदार मानते हुए समिति को 3 लाख 63 हजार रुपये की जमा राशि के साथ बकाया ब्याज, मानसिक प्रताड़ना और मुकदमा खर्च समेत कुल 5 लाख 85 हजार 425 रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया है। यह राशि शिकायतकर्ता कृष्णा चटर्जी को आदेश की तारीख से 45 दिनों के भीतर देनी होगी।

यह मामला चाईबासा के गुटुसाई मोहल्ला निवासी कृष्णा चटर्जी, पुत्री पुरुषोत्तम चटर्जी ने दायर किया था। उन्होंने हमारा इंडिया क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड के खिलाफ उपभोक्ता आयोग में सीसी केस नंबर 36/2025 दर्ज कराया था। मामले की शुरुआत 23 सितंबर 2025 को हुई थी, जबकि अंतिम सुनवाई 5 अगस्त 2026 को पूरी हुई। आयोग ने 13 अगस्त 2026 को अपना फैसला सुनाया।

शिकायत में बताया गया कि कृष्णा चटर्जी की मां स्वर्गीय पुतुल चटर्जी ने 28 जून 2019 को सहकारी समिति की योजना में 3 लाख 63 हजार रुपये जमा किए थे। इस राशि की परिपक्वता तिथि 28 जून 2024 निर्धारित थी और कृष्णा चटर्जी को नामिनी बनाया गया था। हालांकि, परिपक्वता अवधि पूरी होने से पहले ही 12 फरवरी 2024 को पुतुल चटर्जी का निधन हो गया। इसके बाद नामिनी होने के बावजूद कृष्णा चटर्जी को जमा राशि और उस पर मिलने वाला ब्याज नहीं दिया गया।

शिकायतकर्ता के अनुसार, समिति की ओर से शुरुआत में तीन बार 3,328 रुपये की मासिक ब्याज राशि का भुगतान किया गया, लेकिन इसके बाद भुगतान रोक दिया गया। जमा राशि और बकाया ब्याज के भुगतान के लिए परिजनों ने समिति को पत्राचार भी किया, लेकिन उनकी मांग पर कोई संतोषजनक कार्रवाई नहीं की गई।

मामले की सुनवाई के दौरान आयोग ने पाया कि नोटिस प्राप्त होने के बावजूद समिति की ओर से सुनवाई में उपस्थित होकर अपना पक्ष नहीं रखा गया। 21 अक्टूबर 2025 को नोटिस मिलने के बाद भी लगातार अवसर दिए जाने के बावजूद समिति का कोई प्रतिनिधि आयोग के समक्ष उपस्थित नहीं हुआ। इसके बाद 21 जनवरी 2026 को आयोग ने मामले की सुनवाई एकतरफा करने का आदेश दिया।

आयोग ने मामले में प्रस्तुत बॉन्ड, स्वर्गीय पुतुल चटर्जी का मृत्यु प्रमाण पत्र, समिति को भेजे गए पत्र, बैंक पासबुक, अन्य दस्तावेज और शिकायतकर्ता के शपथपत्र का परीक्षण किया। दस्तावेजों के आधार पर आयोग ने माना कि समिति ने निर्धारित शर्तों के अनुसार जमा राशि और ब्याज का भुगतान नहीं कर सेवा में कमी की है। आयोग ने इसे उपभोक्ता के हितों के विपरीत अनुचित व्यापार व्यवहार भी माना।

आयोग ने 10 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से 57 माह के बकाया ब्याज की गणना करते हुए 1 लाख 72 हजार 425 रुपये निर्धारित किए। इसके अलावा सेवा में कमी और मानसिक प्रताड़ना के लिए 40 हजार रुपये तथा मुकदमा खर्च के रूप में 10 हजार रुपये देने का निर्देश दिया गया। मूल जमा राशि 3 लाख 63 हजार रुपये और ब्याज समेत यह रकम कुल 5 लाख 85 हजार 425 रुपये होती है।

आयोग ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया है कि निर्धारित 45 दिनों की अवधि में भुगतान नहीं किए जाने पर मूलधन और ब्याज की राशि पर फैसला सुनाए जाने की तारीख से 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देना होगा। आयोग ने कहा कि किसी सदस्य से राशि स्वीकार करने के बाद निर्धारित अवधि में उसके मूलधन और ब्याज का भुगतान नहीं करना सेवा में कमी की श्रेणी में आता है। सहकारी समिति के लिए अपने सदस्यों के प्रति पारदर्शिता, जवाबदेही और सद्भावना के साथ कार्य करना आवश्यक है।

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