New Delhi: पीएम नरेंद्र मोदी ने विश्व बाघ दिवस पर वन्यजीव प्रेमियों को शुभकामनाएं देते हुए बाघ संरक्षण में वन कर्मियों, वैज्ञानिकों और संरक्षणवादियों के योगदान की सराहना की। पीएम मोदी ने कहा कि भारत के लोगों को इस बात पर गर्व है कि दुनिया की लगभग 70 प्रतिशत बाघ आबादी देश में है।
Greetings to all wildlife enthusiasts on Global Tiger Day. The people of India are proud of the fact that we are home to almost 70% of the global tiger population. India’s tiger conservation efforts are inspired by our centuries-old culture of living in harmony with nature and… pic.twitter.com/OwOSyDDcc7
— Narendra Modi (@narendramodi) July 29, 2026
पीएम नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “विश्व बाघ दिवस पर सभी वन्यजीव प्रेमियों को शुभकामनाएं। भारत के लोगों को इस बात पर गर्व है कि दुनिया की लगभग 70 प्रतिशत बाघ आबादी हमारे देश में है। बाघों के संरक्षण के लिए भारत की कोशिशें प्रकृति के साथ मिल-जुलकर रहने की हमारी सदियों पुरानी संस्कृति से प्रेरित हैं और हमारे लोगों के सामूहिक संकल्प से आगे बढ़ रही हैं।”
बाघ संरक्षण में समुदाय की भागीदारी पर जोर
पीएम ने अपने पोस्ट में विज्ञान आधारित संरक्षण, समुदाय की भागीदारी और टिकाऊ विकास के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि ये प्रयास देश में बाघ संरक्षण को मजबूत कर रहे हैं। पीएम मोदी ने बाघों की सुरक्षा में वन कर्मियों, वैज्ञानिकों और संरक्षणवादियों की कोशिशों और समर्पण को भी अहम बताया। उन्होंने कहा कि भारत स्थानीय समुदायों को सशक्त बनाने और इंसान व वन्यजीवों के बीच टकराव को कम करने के लिए प्रतिबद्ध है। भारत ने विज्ञान आधारित नीतियों और मजबूत संस्थागत सहयोग के जरिए बाघ संरक्षण के क्षेत्र में दुनिया में अपनी पहचान बनाई है। तकनीक आधारित निगरानी, प्रभावी शासन और सामुदायिक भागीदारी ने संरक्षण प्रयासों को और मजबूत किया है। भारत बाघों और उनके प्राकृतिक आवासों का भविष्य सुरक्षित करने के लिए वैश्विक सहयोग को भी बढ़ावा दे रहा है।
भारत में बाघों की संख्या 3,682
2006 के बाद से देश में वैज्ञानिक तरीके से गिने गए बाघों की संख्या दोगुनी से भी अधिक हो गई है। ‘अखिल भारतीय बाघ अनुमान (2022)’ के अनुसार, भारत में बाघों की संख्या 3,682 है। 2022 के अखिल भारतीय बाघ अनुमान में 20 राज्यों को शामिल किया गया था। इस दौरान 6.41 लाख किलोमीटर से अधिक क्षेत्र पैदल तय कर सर्वेक्षण किया गया।
प्रोजेक्ट टाइगर से मजबूत हुआ संरक्षण
भारत की बाघ संरक्षण नीति में लंबे समय की सोच के साथ राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर लगातार संस्थागत सहयोग शामिल है। ‘प्रोजेक्ट टाइगर’, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) और बाघ संरक्षण योजनाएं मिलकर बाघों के प्राकृतिक आवास के लिए विज्ञान आधारित प्रशासनिक ढांचा तैयार करते हैं। ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ भारत सरकार की प्रमुख केंद्रीय प्रायोजित योजना है, जिसे पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की ओर से लागू किया जाता है। इसका उद्देश्य बाघों की आबादी को उनके प्राकृतिक आवासों में सुरक्षित रखना है। योजना के तहत बाघ वाले राज्यों को संरक्षण प्रयासों के लिए वित्तीय और तकनीकी सहायता दी जाती है। इसमें आवास की सुरक्षा, वैज्ञानिक प्रबंधन और नियमित जमीनी निगरानी को शामिल किया गया है।
18 राज्यों में 58 बाघ अभ्यारण्य का नेटवर्क
राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) की रिपोर्ट 2023 के अनुसार, ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ ने 18 बाघ-रेंज वाले राज्यों में 58 बाघ अभ्यारण्य का नेटवर्क स्थापित किया है। ये अभ्यारण्य करीब 84,500 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले हैं, जो भारत के भौगोलिक क्षेत्रफल का लगभग 2.56 प्रतिशत है। ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ देश के वन्यजीव संरक्षण प्रयासों की आधारशिला बना हुआ है और बाघों व उनके प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा के प्रति सरकार की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है।




