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गिलोय क्यों कहलाती है ‘अमृता’? इम्युनिटी से पाचन तक जानें इसके बड़े फायदे

आयुर्वेद में गिलोय को अमृता कहा जाता है और इसका इस्तेमाल बुखार, पाचन व अन्य समस्याओं में किया जाता रहा है। हालांकि इसके कई स्वास्थ्य लाभों पर वैज्ञानिक प्रमाण सीमित हैं और सेवन में सावधानी जरूरी है।
गिलोय के फायदे

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Health Desk: आयुर्वेद में गिलोय को ‘अमृता’ के नाम से भी जाना जाता है और पारंपरिक रूप से इसका इस्तेमाल कई स्वास्थ्य समस्याओं में किया जाता रहा है। आयुर्वेद विशेषज्ञों के अनुसार, सही मात्रा और उचित तरीके से इसका सेवन किया जाना चाहिए। हालांकि गिलोय को किसी बीमारी का चमत्कारी इलाज मानने के बजाय सहायक आयुर्वेदिक औषधि के रूप में ही देखना चाहिए।

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इम्युनिटी के लिए गिलोय का पारंपरिक इस्तेमाल

आयुर्वेद में गिलोय का उपयोग शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को सहारा देने के लिए किया जाता रहा है। बदलते मौसम में होने वाली सर्दी-जुकाम और बुखार जैसी समस्याओं में भी इसका पारंपरिक इस्तेमाल होता है। हालांकि गिलोय से इम्युनिटी बढ़ने और संक्रमण से बचाव के दावों पर वैज्ञानिक प्रमाण अभी सीमित हैं। इसलिए किसी संक्रमण या बीमारी के इलाज के विकल्प के रूप में इसका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

पाचन संबंधी समस्याओं में भी होता है उपयोग

आयुर्वेद के जानकार गिलोय का इस्तेमाल अपच, गैस, कब्ज और भूख कम लगने जैसी समस्याओं में भी करते हैं। इसका रस या काढ़ा पारंपरिक रूप से पाचन संबंधी समस्याओं में लिया जाता रहा है। बुखार में भी गिलोय के काढ़े या रस का उपयोग किया जाता है। तेज या लंबे समय तक बुखार रहने पर केवल घरेलू या आयुर्वेदिक उपायों पर निर्भर रहने के बजाय डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।

ब्लड शुगर को लेकर बरतें सावधानी

कुछ अध्ययनों में गिलोय के रक्त शर्करा पर संभावित प्रभाव की जांच की गई है, लेकिन डायबिटीज के इलाज में इसकी प्रभावशीलता स्थापित करने के लिए पर्याप्त प्रमाण नहीं हैं। जो लोग पहले से ब्लड शुगर कम करने वाली दवाएं लेते हैं, उन्हें गिलोय का सेवन बिना चिकित्सकीय सलाह के नहीं करना चाहिए। अन्य दवाओं या स्वास्थ्य स्थितियों के साथ भी इसका प्रभाव अलग हो सकता है।

जोड़ों और त्वचा के लिए पारंपरिक उपयोग

आयुर्वेद में गिलोय का इस्तेमाल जोड़ों के दर्द और गठिया जैसी समस्याओं में भी किया जाता है। इसमें मौजूद कुछ प्राकृतिक तत्वों के सूजन पर संभावित प्रभाव को लेकर अध्ययन हुए हैं। त्वचा संबंधी समस्याओं में भी इसका पारंपरिक उपयोग किया जाता रहा है। हालांकि मुंहासे, खुजली या अन्य त्वचा रोग होने पर गिलोय को प्रमाणित चिकित्सा उपचार का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।

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गिलोय का सेवन ताजी डंठल से निकाले गए रस या काढ़े के रूप में किया जाता है। इसके इस्तेमाल की मात्रा व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य और अन्य दवाओं के आधार पर अलग हो सकती है, इसलिए नियमित सेवन से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है।

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