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Jamshedpur news: पूर्वी सिंहभूम जिले के पोटका प्रखंड अंतर्गत हल्दीपोखर और बुरूडीह गांव में रविवार को बांग्ला भाषा के संरक्षण और नई पीढ़ी को मातृभाषा से जोड़ने के उद्देश्य से ‘अपूर पाठशाला’ का शुभारंभ किया गया। झारखंड बांग्लाभाषी उन्नयन समिति, सिंहभूम बंगीय एसोसिएशन, सूंढ़ी समाज उत्थान समिति पोटका-सह-राजनगर तथा माताजी आश्रम हाता के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में स्थानीय ग्रामीणों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए साहित्यकार सुनील कुमार दे ने कहा कि सरकारी स्तर पर अपेक्षित प्रोत्साहन नहीं मिलने के कारण बांग्ला भाषा का दायरा लगातार सिमटता जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि समाज स्वयं आगे आकर मातृभाषा के संरक्षण का दायित्व नहीं निभाएगा, तो आने वाली पीढ़ियां अपनी भाषाई विरासत से दूर हो जाएंगी। उन्होंने बांग्ला शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।
नवस्थापित पाठशालाओं के संचालन की जिम्मेदारी भी तय की गई। हल्दीपोखर स्थित पाठशाला का संचालन कृष्णपदो मंडल करेंगे, जबकि बुरूडीह की पाठशाला का दायित्व प्रियंका मंडल और शिखा मंडल संभालेंगी। इस अवसर पर बच्चों के बीच निशुल्क बांग्ला भाषा की पुस्तकें, कॉपियां और कलम वितरित किए गए, जिससे वे नियमित रूप से अध्ययन कर सकें।
कार्यक्रम में सूंढ़ी समाज उत्थान समिति के अध्यक्ष सोमेन मंडल ने घोषणा की कि पाठशाला में नियमित उपस्थिति दर्ज कराने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया जाएगा। साथ ही बांग्ला भाषा में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के इच्छुक मेधावी छात्रों को हरसंभव सहयोग भी उपलब्ध कराया जाएगा।
समारोह में विभिन्न सामाजिक एवं सांस्कृतिक संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। सभी ने इस पहल को बांग्ला भाषा और संस्कृति के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताते हुए इसे निरंतर आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।

