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New Delhi: नीट यूजी 2026 पेपर लीक मामले में बुधवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया। दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट ने मामले के दो प्रमुख आरोपियों पीवी कुलकर्णी और शिवराज मोटेगांवकर की न्यायिक हिरासत 8 जुलाई तक बढ़ा दी है। दोनों आरोपियों को 14 दिन की पूर्व न्यायिक हिरासत समाप्त होने के बाद अदालत में पेश किया गया था, जहां सुनवाई के बाद कोर्ट ने उन्हें फिलहाल जेल में ही रखने का आदेश दिया।
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सीबीआई की जांच में पीवी कुलकर्णी की भूमिका को बेहद अहम माना जा रहा है। जांच एजेंसी के अनुसार, कुलकर्णी इस कथित पेपर लीक नेटवर्क का मास्टरमाइंड है। वह महाराष्ट्र के लातूर का सेवानिवृत्त रसायन विज्ञान प्रोफेसर है और कई वर्षों तक नीट परीक्षा के प्रश्नपत्र तैयार करने वाले पैनल का हिस्सा रह चुका है।
‘मास्टरमाइंड पर सीबीआई का बड़ा दावा’
सीबीआई का आरोप है कि कुलकर्णी ने परीक्षा प्रक्रिया से जुड़ी अपनी जानकारी और पहुंच का दुरुपयोग किया। जांच के मुताबिक, उसने पुणे में विशेष कोचिंग कक्षाओं के माध्यम से छात्रों तक प्रश्नपत्र पहुंचाने की साजिश रची। एजेंसी का दावा है कि इसी नेटवर्क के जरिए परीक्षा से पहले गोपनीय जानकारी लीक की गई।
वहीं दूसरे आरोपी शिवराज मोटेगांवकर लातूर स्थित आरसीसी कोचिंग संस्थान का संचालक बताया जा रहा है। जांच एजेंसियों के अनुसार, परीक्षा आयोजित होने से करीब 10 दिन पहले ही उसके पास प्रश्नपत्र और उनके उत्तर पहुंच गए थे।
‘कोचिंग नेटवर्क के जरिए पेपर पहुंचाने का आरोप’
जांच में सामने आया है कि मोटेगांवकर ने कथित तौर पर एनटीए पैनल से जुड़े कुछ लोगों, पीवी कुलकर्णी और मनीषा मंदारे के माध्यम से प्रश्नपत्र हासिल किया था। इसके बाद उसने कुछ कोचिंग संस्थानों और छात्रों तक प्रश्नपत्र पहुंचाने में भूमिका निभाई। फिलहाल सीबीआई इस पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने और अन्य संभावित आरोपियों की भूमिका की जांच कर रही है।
गौरतलब है कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने नीट यूजी 2026 परीक्षा का आयोजन मूल रूप से 3 मई को किया था। हालांकि पेपर लीक के आरोप सामने आने के बाद परीक्षा को रद्द कर दिया गया। बाद में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी के बीच 21 जून को परीक्षा दोबारा आयोजित कराई गई।
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इस परीक्षा में देशभर से 20 लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने पंजीकरण कराया था। परीक्षा एक ही शिफ्ट में दोपहर 2 बजे से शाम 5:15 बजे तक ऑफलाइन मोड में आयोजित की गई थी। मामले की जांच अभी जारी है और एजेंसियां पेपर लीक से जुड़े पूरे नेटवर्क का पता लगाने में जुटी हुई हैं।

