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फीफा विश्वकप 2026: मुंह छिपाकर बहस की तो सीधे मिलेगा रेड कार्ड!

Washington, (US): आगामी फीफा विश्वकप 2026 फुटबॉल इतिहास का सबसे अनोखा और कड़े नियमों वाला टूर्नामेंट बनने जा रहा है। अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको की संयुक्त मेजबानी में होने वाले इस महाकुंभ में फुटबॉल के खेल में कई अभूतपूर्व नियम लागू किए जाएंगे। इन बदलावों

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Washington, (US): आगामी फीफा विश्वकप 2026 फुटबॉल इतिहास का सबसे अनोखा और कड़े नियमों वाला टूर्नामेंट बनने जा रहा है। अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको की संयुक्त मेजबानी में होने वाले इस महाकुंभ में फुटबॉल के खेल में कई अभूतपूर्व नियम लागू किए जाएंगे। इन बदलावों का मुख्य मकसद मैदान पर खिलाड़ियों के बर्ताव को सुधारना, अनुशासन को मजबूत करना और खेल भावना को बढ़ावा देना है।

आगामी 11 जून से शुरू होने वाले इस वैश्विक टूर्नामेंट में अब खिलाड़ी मैच के दौरान रेफरी या विपक्षी टीम से बहस करते वक्त अपना मुंह नहीं छिपा पाएंगे। अगर कोई भी खिलाड़ी ऐसा करता पकड़ा गया, तो रेफरी उसे तुरंत रेड कार्ड दिखाकर मैदान से बाहर का रास्ता साफ कर देगा। फीफा ने यह बड़ा कदम मैदान पर होने वाली मौखिक बदतमीजी, गाली-गलौज और खासकर नस्लीय टिप्पणियों को पूरी तरह रोकने के लिए उठाया है, जिसने अतीत में कई बार इस खूबसूरत खेल की साख को नुकसान पहुंचाया है।

मौखिक दुर्व्यवहार पर लगाम कसने के अलावा, अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल के नियम तय करने वाली सर्वोच्च संस्था, इंटरनेशनल फुटबॉल एसोसिएशन बोर्ड (आईएफएबी) ने एक और बेहद कड़ा फैसला सुनाया है। नए नियम के मुताबिक, अब रेफरी के किसी फैसले के विरोध में गुस्सा होकर मैदान छोड़ने वाले किसी भी खिलाड़ी को तत्काल प्रभाव से रेड कार्ड थमा दिया जाएगा। बड़ी बात यह है कि यह नियम सिर्फ खिलाड़ियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि टीम के उन कोचों और अधिकारियों पर भी समान रूप से लागू होगा जो अपने खिलाड़ियों को विरोध प्रदर्शन के लिए मैदान से बाहर बुलाने या उकसाने का काम करेंगे। आईएफएबी ने साफ कर दिया है कि इस विश्व कप में हिस्सा ले रहीं सभी 48 टीमों को इन कड़े बदलावों के बारे में पहले ही विस्तार से समझा दिया जाएगा ताकि टूर्नामेंट के दौरान किसी भी तरह के भ्रम या गलतफहमी की गुंजाइश न रहे।

खिलाड़ियों को मिलेगी बड़ी राहत, यलो कार्ड का नियम बदला

इन सख्त अनुशासनात्मक बदलावों के बीच फीफा ने खिलाड़ियों को एक बड़ी राहत भी दी है। विश्व कप के यलो (पीले) कार्ड से जुड़े नियमों में एक बड़ा और लचीला संशोधन किया गया है, ताकि नॉकआउट जैसे महत्वपूर्ण और बड़े मैचों में स्टार खिलाड़ियों को सस्पेंशन (निलंबन) के डर से न जूझना पड़े। नए नियम के तहत, पूरे टूर्नामेंट के दौरान किसी खिलाड़ी को मिले पीले कार्ड दो अलग-अलग मौकों पर उसके रिकॉर्ड से पूरी तरह साफ कर दिए जाएंगे। फीफा परिषद ने आधिकारिक रूप से तय किया है कि ग्रुप चरण के मैचों में खिलाड़ियों को मिले यलो कार्ड नॉकआउट चरण में नहीं गिने जाएंगे। यानी नॉकआउट राउंड में पहुंचते ही सभी खिलाड़ियों का रिकॉर्ड बिल्कुल साफ (क्लीन स्लेट) हो जाएगा। ठीक इसी तरह, क्वार्टर फाइनल मैच में मिला एक पीला कार्ड भी अगले सेमीफाइनल और फाइनल मैचों के लिए अमान्य माना जाएगा।

आपको बता दें कि इससे पहले के विश्व कप नियमों के अनुसार, यदि किसी खिलाड़ी को दो अलग-अलग मैचों में यलो कार्ड मिलता था, तो उसे अगले एक मैच के लिए प्रतिबंधित कर दिया जाता था। हालांकि, पुराने नियमों में केवल क्वार्टर फाइनल के बाद ही यलो कार्ड को रद्द करने की व्यवस्था थी, जिससे यह पक्का होता था कि सेमीफाइनल में कार्ड मिलने की वजह से कोई खिलाड़ी फाइनल मैच खेलने से न चूके। अब इस नियम को और विस्तार देकर फीफा ने खिलाड़ियों को बिना किसी फालतू मानसिक दबाव के अपनी पूरी क्षमता के साथ बड़े मैचों में खेलने का शानदार मौका दिया है। निश्चित तौर पर ये नए नियम फीफा विश्वकप 2026 को न केवल खेल के रोमांच बल्कि नैतिकता, अनुशासन और निष्पक्षता के मामले में भी एक बिल्कुल नए स्तर पर ले जाएंगे।

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