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Home»#Trending»‘काला मोतिया’ छीन सकता है रोशनी, 40 के बाद साल में एक बार जांच जरूरी
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‘काला मोतिया’ छीन सकता है रोशनी, 40 के बाद साल में एक बार जांच जरूरी

By Muzaffar HussainMarch 12, 20262 Mins Read
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रांची: विश्व ग्लूकोमा दिवस के अवसर पर गुरुवार को राजधानी रांची के सदर अस्पताल में जागरूकता की अलख जगाई गई। ‘ग्लूकोमा मुक्त विश्व के लिए एकजुट करना’ थीम के साथ आयोजित इस कार्यक्रम में स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इस “खामोश बीमारी” से बचाव के मंत्र साझा किए। कार्यक्रम की शुरुआत सिविल सर्जन डॉ. प्रभात कुमार ने प्रभात फेरी को हरी झंडी दिखाकर की, जिसमें स्वास्थ्य कर्मियों और एएनएम स्कूल की छात्राओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

क्यों है यह ‘साइलेंट किलर’?

सिविल सर्जन डॉ. प्रभात कुमार ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए बताया कि ग्लूकोमा (काला मोतिया) एक ऐसी बीमारी है जो बिना किसी स्पष्ट लक्षण के धीरे-धीरे आंखों की रोशनी को निगल जाती है। उन्होंने चेतावनी दी कि 40 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों, शुगर और बीपी के मरीजों को हर छह महीने या साल भर में आंखों की जांच जरूर करानी चाहिए।

बीमारी के लक्षण जिन्हें नजरअंदाज न करें:

डॉक्टरों ने बताया कि अगर आपको नीचे दिए गए लक्षण महसूस हों, तो तुरंत नेत्र विशेषज्ञ से संपर्क करें:

  • नजर का धुंधला होना।

  • तेज रोशनी के चारों ओर इंद्रधनुषी घेरे दिखाई देना।

  • आंखों और सिर में तेज दर्द के साथ उल्टी महसूस होना।

  • धीरे-धीरे ‘साइड विजन’ (बगल की दृष्टि) का कम हो जाना।

ऑप्टिक नस पर दबाव और अंधापन

नेत्र विशेषज्ञ डॉ. प्रीतीश प्रणय ने तकनीकी जानकारी देते हुए बताया कि ग्लूकोमा में आंखों के अंदर का दबाव बढ़ जाता है, जिससे आंखों की ऑप्टिक नस (Optic Nerve) क्षतिग्रस्त हो जाती है। यह अंधापन का दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा कारण है। सबसे डरावनी बात यह है कि ग्लूकोमा से एक बार जो रोशनी चली जाती है, उसे वापस नहीं लाया जा सकता; इलाज केवल बची हुई रोशनी को सुरक्षित रखने के लिए किया जाता है।

किसे है अधिक खतरा?

विशेषज्ञों के अनुसार, यदि परिवार में पहले से किसी को काला मोतिया रहा हो (Genetics), तो अगली पीढ़ी में इसका खतरा काफी बढ़ जाता है। इसके अलावा आंखों में चोट लगना या कुछ दवाओं का अनियंत्रित सेवन भी इसका कारण बन सकता है। 8 मार्च से 14 मार्च तक चलने वाले इस ‘ग्लूकोमा सप्ताह’ के तहत जिले के सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में मुफ्त जांच और परामर्श की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।

कार्यक्रम में अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अमरेंद्र कुमार, डॉ. प्रिया और जिला कार्यक्रम प्रबंधक प्रवीण कुमार सिंह सहित कई स्वास्थ्य अधिकारी मौजूद रहे, जिन्होंने समाज में जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया।

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