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सदन में घिरे स्वास्थ्य मंत्री, विधायक बोले-कचरे के ढेर पर अस्पताल, सरकार ने दिए जांच के आदेश

रांची: झारखंड विधानसभा के बजट सत्र का आठवां दिन शुक्रवार को काफी हंगामेदार रहा। सदन की कार्यवाही के दौरान राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था, विशेषकर बायो-मेडिकल वेस्ट (जैव-चिकित्सा अपशिष्ट) के निपटान में हो रही भारी लापरवाही का मुद्दा प्रमुखता से छाया रहा। भाकपा (माले) के विधायक

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रांची: झारखंड विधानसभा के बजट सत्र का आठवां दिन शुक्रवार को काफी हंगामेदार रहा। सदन की कार्यवाही के दौरान राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था, विशेषकर बायो-मेडिकल वेस्ट (जैव-चिकित्सा अपशिष्ट) के निपटान में हो रही भारी लापरवाही का मुद्दा प्रमुखता से छाया रहा। भाकपा (माले) के विधायक चंद्रदेव महतो ने सरकार को घेरते हुए यह सवाल खड़ा किया कि आखिर मरीजों की जान बचाने वाले अस्पताल खुद बीमारी का केंद्र क्यों बन रहे हैं?

धनबाद की एजेंसी पर गंभीर आरोप

विधायक महतो ने सदन का ध्यान धनबाद की ओर खींचते हुए कहा कि वहां बायो-मेडिकल वेस्ट ट्रीटमेंट प्लांट की स्थिति बदतर है। उन्होंने आरोप लगाया कि कचरे के निष्पादन के लिए जिम्मेदार एजेंसी अपनी भूमिका निभाने में पूरी तरह विफल रही है। मामला तब और गंभीर हो गया जब उन्होंने खुलासा किया कि खुद मेडिकल कॉलेज के अधीक्षक ने इस लापरवाही के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। विधायक ने सवाल किया कि जब प्लांट होने के बावजूद समय पर कचरा नहीं हटाया जा रहा, तो ऐसी एजेंसियों पर मेहरबानी क्यों?

सरकार का पक्ष और मंत्री का आश्वासन

सवालों की बौछार के बीच स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने स्थिति को स्पष्ट करने का प्रयास किया। उन्होंने सदन को सूचित किया कि वर्तमान में राज्य के छह जिलों में बायो-मेडिकल वेस्ट प्लांट सुचारू रूप से कार्य कर रहे हैं। साथ ही, उन्होंने भविष्य की योजना साझा करते हुए कहा कि सरकार आने वाले समय में राज्य के अन्य प्रमुख अस्पतालों में भी आधुनिक प्लांट स्थापित करने पर विचार कर रही है।

विपक्ष का प्रहार और जांच का आदेश

हालांकि, मंत्री के जवाब से विधायक संतुष्ट नजर नहीं आए और उन्होंने संबंधित एजेंसी के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग की। इस बहस में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने भी हस्तक्षेप किया। उन्होंने कड़े लहजे में कहा कि जब मामला सदन के पटल पर आ गया है और साक्ष्य सामने हैं, तो सरकार को टालमटोल करने के बजाय ठोस कदम उठाने चाहिए।

सदन के बढ़ते दबाव को देखते हुए स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने आश्वासन दिया कि धनबाद में कार्यरत एजेंसी के कामकाज की गहन जांच कराई जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि लापरवाही की पुष्टि होती है, तो संबंधित एजेंसी के खिलाफ कड़ी कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

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