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पारंपरिक खेती छोड़ स्ट्रॉबेरी की ओर बढ़े नालंदा के किसान, बदली गांव की तकदीर

Bihar Sharif: बिहार के नालंदा जिले में खेती का पारंपरिक ढर्रा अब तेजी से बदल रहा है। जिले के नूरसराय प्रखंड स्थित मनारा गांव के किसान रबी और खरीफ की पुरानी सीमाओं को तोड़ते हुए अब स्ट्रॉबेरी की खेती से अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर

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Bihar Sharif: बिहार के नालंदा जिले में खेती का पारंपरिक ढर्रा अब तेजी से बदल रहा है। जिले के नूरसराय प्रखंड स्थित मनारा गांव के किसान रबी और खरीफ की पुरानी सीमाओं को तोड़ते हुए अब स्ट्रॉबेरी की खेती से अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर रहे हैं। मंगलवार को आयोजित एक संगोष्ठी में गांव के प्रगतिशील किसान राजेश प्रसाद ने अपने अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि कैसे नगदी फसलें किसानों के लिए गेमचेंजर साबित हो रही हैं।

आधुनिक तकनीक और मेहनत का संगम

राजेश प्रसाद ने बताया कि शुरुआत में स्ट्रॉबेरी जैसी विदेशी फसल को लेकर गांव में काफी संशय था। लेकिन उन्होंने आधुनिक तकनीक और मेहनत के दम पर इसे सफल कर दिखाया। उन्होंने अपने एक एकड़ खेत में स्ट्रॉबेरी लगाई है और सिंचाई के लिए ‘ड्रिप इरिगेशन’ (टपक सिंचाई) पद्धति का सहारा लिया है। इससे न केवल पानी की बचत होती है, बल्कि पौधों को जरूरत के अनुसार सटीक नमी मिलती रहती है। जैविक खाद के उपयोग से फसल की गुणवत्ता भी बाजार में अव्वल रहती है।

रोजाना 10 से 20 हजार की नकद आमदनी

आमदनी के आंकड़ों पर बात करते हुए राजेश प्रसाद ने बताया कि शुरुआती पूंजी निवेश के बाद इस खेती से प्रतिदिन 10 से 20 हजार रुपये तक की नकद कमाई संभव है। स्ट्रॉबेरी की मांग शहरी क्षेत्रों में बहुत अधिक है। स्थिति यह है कि व्यापारियों को बाजार जाने की जरूरत नहीं पड़ती, बल्कि वे खुद सीधे खेत पर पहुंचकर फसल खरीद रहे हैं। इससे किसानों को तत्काल भुगतान और उचित दाम मिल रहा है।

अन्य किसानों के लिए प्रेरणा

राजेश अब गांव के दूसरे किसानों के लिए भी मार्गदर्शक बन गए हैं। वे समय-समय पर किसानों को पौधरोपण, रोग नियंत्रण और बाजार की समझ की जानकारी देते हैं। उनका मानना है कि यदि सही मार्गदर्शन मिले, तो छोटे और मध्यम किसान स्ट्रॉबेरी जैसी नगदी फसलों से अपनी आय दोगुनी कर सकते हैं। हालांकि, वे आगाह भी करते हैं कि इसमें नियमित देखभाल और तकनीकी समझ बेहद जरूरी है। मनारा गांव की यह पहल अब पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणास्रोत बन रही है।

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