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लॉरेंस बिश्नोई की बादशाहत खतरे में! 5 खूंखार दुश्मन गैंग ने मिलाया हाथ

India News: उत्तर भारत के जरायम जगत का समीकरण अब पूरी तरह बदल चुका है। साबरमती जेल में बंद लॉरेंस बिश्नोई भले ही खुद को इस दुनिया का बेताज बादशाह समझता हो, लेकिन अब उसके साम्राज्य को ढहाने के लिए पांच बड़े ‘गैंगस्टर सिंडिकेट्स’ ने

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India News: उत्तर भारत के जरायम जगत का समीकरण अब पूरी तरह बदल चुका है। साबरमती जेल में बंद लॉरेंस बिश्नोई भले ही खुद को इस दुनिया का बेताज बादशाह समझता हो, लेकिन अब उसके साम्राज्य को ढहाने के लिए पांच बड़े ‘गैंगस्टर सिंडिकेट्स’ ने हाथ मिला लिया है।

लॉरेंस बिश्नोई के ‘डेथ वारंट’ पर 5 गैंग के दस्तखत! तिहाड़ में अनमोल की एंट्री से बढ़ी खूनी गैंगवार की आहट

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और खुफिया एजेंसियों के इनपुट बता रहे हैं कि तिहाड़ जेल अब उत्तर भारत के सबसे खूंखार गैंगस्टरों के बीच खूनी संघर्ष का नया केंद्र बनने जा रही है। खास तौर पर लॉरेंस के भाई अनमोल बिश्नोई की तिहाड़ में एंट्री ने दुश्मनों को घर बैठे शिकार का मौका दे दिया है।

बंबीहा और नीरज बवाना का ‘डेथ स्क्वाड’: बिश्नोई के लिए बना काल

लॉरेंस का सबसे पुराना और कट्टर दुश्मन ‘बंबीहा गैंग’ अब और भी ज्यादा आक्रामक हो गया है। दविंदर बंबीहा की मौत के बाद आर्मेनिया से लकी पटियाल इस गैंग की कमान संभाल रहा है। मूसेवाला हत्याकांड का बदला लेने के लिए इस गैंग ने शूटरों की एक अंतरराष्ट्रीय फौज तैयार की है। वहीं, दिल्ली का ‘डॉन’ कहा जाने वाला नीरज बवाना तिहाड़ के भीतर से ही बिश्नोई गैंग के पैर उखाड़ने में जुटा है। बवाना और बंबीहा का यह गठबंधन लॉरेंस के लिए सबसे घातक साबित हो रहा है, क्योंकि दिल्ली-एनसीआर में बवाना की पकड़ इतनी मजबूत है कि वहां बिश्नोई के शूटरों का टिक पाना नामुमकिन है।

विदेशी धरती से ‘रिमोट कंट्रोल’ पर गैंगवार: अर्श डाला और हिमांशु भाऊ की एंट्री

इस जंग में अब दो नए खिलाड़ी शामिल हुए हैं जो सात समंदर पार से मौत का फरमान सुना रहे हैं। कनाडा में बैठा अर्श डाला अत्याधुनिक हथियारों और डिजिटल भर्ती के जरिए सीधे बिश्नोई सिंडिकेट पर प्रहार कर रहा है। वहीं, महज 22 साल का हिमांशु उर्फ ‘भाऊ’, जो अमेरिका से अपना गैंग चला रहा है, रोहतक और दिल्ली के व्यापारियों के लिए काल बन गया है। भाऊ सीधे तौर पर नीरज बवाना का करीबी है और राजौरी गार्डन जैसी वारदातों ने साबित कर दिया है कि वह बिश्नोई के करीबियों को मिट्टी में मिलाने के लिए किसी भी हद तक जा सकता है।

तिहाड़ जेल में जमावड़ा: क्या होने वाला है बड़ा कत्लेआम?

जांच एजेंसियों की चिंता का सबसे बड़ा विषय यह है कि ये सभी प्रतिद्वंद्वी गुट इस समय तिहाड़ जेल के अलग-अलग वार्डों में सक्रिय हैं। गुरुग्राम का कौशल चौधरी भी जेल के भीतर से बिश्नोई की ‘बी-कंपनी’ को खत्म करने का ब्लूप्रिंट तैयार कर चुका है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि ये गैंग अब एक-दूसरे के साथ गठबंधन कर ‘डी-कंपनी’ से भी बड़ा अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क तैयार कर चुके हैं, जिनका प्रसार 25 से अधिक देशों में हो चुका है। अनमोल बिश्नोई की सुरक्षा अब जेल प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती है, क्योंकि चारों तरफ से घेरे जा चुके बिश्नोई साम्राज्य के लिए आने वाले दिन बेहद खूनी साबित हो सकते हैं।

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