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DSPMU के गेट पर लिखा गया शहीद वीर बुधु भगत विश्वविद्यालय, छात्र संगठनों ने किया प्रदर्शन

झारखंड की राजधानी रांची में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय (DSPMU) का नाम बदलने का मामला फिर चर्चा में आ गया है। कैबिनेट से नाम बदलने की मंजूरी मिलने के करीब डेढ़ साल बाद भी सरकारी दस्तावेजों में विश्वविद्यालय का पुराना नाम ही दर्ज है।

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रांची: झारखंड की राजधानी रांची में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय (DSPMU) का नाम बदलने का मामला फिर चर्चा में आ गया है। कैबिनेट से नाम बदलने की मंजूरी मिलने के करीब डेढ़ साल बाद भी सरकारी दस्तावेजों में विश्वविद्यालय का पुराना नाम ही दर्ज है। इस देरी से नाराज छात्र संगठनों ने विश्वविद्यालय के मुख्य गेट पर विरोध प्रदर्शन किया।

पूर्व मंत्री बंधु तिर्की के नेतृत्व में छात्र अधिकार मोर्चा, आदिवासी छात्र संघ और सरना समिति समेत कई संगठनों के कार्यकर्ता विश्वविद्यालय पहुंचे। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने मुख्य गेट पर लाल रंग से ‘शहीद वीर बुधु भगत विश्वविद्यालय’ लिख दिया। साथ ही शहीद वीर बुधु भगत के सम्मान में नारेबाजी की।

8 मई 2025 को कैबिनेट ने दी थी मंजूरी

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में 8 मई 2025 को हुई कैबिनेट बैठक में DSPMU का नाम बदलकर शहीद वीर बुधु भगत विश्वविद्यालय करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई थी। इसके लिए झारखंड राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम, 2017 में संशोधन करने का निर्णय लिया गया था।

हालांकि, कैबिनेट की मंजूरी के बाद भी नाम बदलने की आधिकारिक प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। इसी कारण सरकारी कागजात और प्रशासनिक रिकॉर्ड में अभी भी पुराना नाम इस्तेमाल किया जा रहा है।

बंधु तिर्की ने प्रशासन पर उठाए सवाल

पूर्व मंत्री बंधु तिर्की ने कहा कि कैबिनेट के फैसले को अब तक लागू नहीं करना प्रशासनिक उदासीनता है। यह झारखंड के शहीदों और राज्य की जनता के सम्मान से जुड़ा मामला है।

वहीं, आदिवासी छात्र संघ के नेता संजय महली ने कहा कि विश्वविद्यालय का नाम शहीद वीर बुधु भगत के नाम पर रखना उनके संघर्ष और बलिदान को सम्मान देना है। छात्र संगठनों ने विश्वविद्यालय परिसर में उनकी प्रतिमा लगाने की मांग भी की है।

नाम बदलने से छात्रों के दस्तावेजों पर क्या होगा असर?

DSPMU के पूर्व कुलपति एसएन मुंडा के अनुसार, विश्वविद्यालय का नाम बदलने से केवल बोर्ड और सरकारी कागजात में बदलाव नहीं होगा, बल्कि इसका असर विद्यार्थियों के शैक्षणिक दस्तावेजों पर भी पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि पुराने नाम से जारी मार्कशीट, डिग्री और अन्य प्रमाणपत्रों को लेकर स्पष्ट व्यवस्था बनानी होगी। इससे छात्रों को नौकरी, आगे की पढ़ाई और दस्तावेजों के सत्यापन में परेशानी नहीं होगी।

इसके अलावा विश्वविद्यालय के ऑनलाइन पोर्टल, शैक्षणिक रिकॉर्ड और प्रमाणपत्र जारी करने की व्यवस्था में भी बदलाव करना पड़ेगा। नाम परिवर्तन की प्रक्रिया इस तरह पूरी होनी चाहिए कि विद्यार्थियों की पढ़ाई, परीक्षा और परिणाम से जुड़े काम प्रभावित न हों।

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