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महंत के बिगड़े बोल कहा- कलाम को बताया आतंकी, अफजल गुरु का हमदर्द?

U.P. News: डासना मंदिर के महंत यति नरसिंहानंद गिरी एक बार फिर अपने तीखे और विवादित बयानों की वजह से सुर्खियों में हैं। इस बार निशाने पर रहे देश के पूर्व राष्ट्रपति और मिसाइल मैन के रूप में प्रसिद्ध डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम। यति के

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U.P. News: डासना मंदिर के महंत यति नरसिंहानंद गिरी एक बार फिर अपने तीखे और विवादित बयानों की वजह से सुर्खियों में हैं। इस बार निशाने पर रहे देश के पूर्व राष्ट्रपति और मिसाइल मैन के रूप में प्रसिद्ध डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम। यति के इस बयान ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में हलचल मचा दी है।

पुलिस के सामने दिए बयान, अधिकारी रहे मौन

घटना उस समय हुई जब पुलिस उन्हें दिल्ली जाने से रोक रही थी। यति प्रधानमंत्री आवास तक मार्च कर ‘इस्लामिक जिहाद पर श्वेत पत्र’ जारी करने की मांग को लेकर रवाना होना चाहते थे। पुलिस ने उन्हें रोका, लेकिन उसी दौरान उन्होंने कई विवादित बातें कहना शुरू कर दिया। पुलिसकर्मी मौके पर मौजूद थे, मगर उनकी प्रतिक्रिया काफी संयमित रही। वीडियो में देखा गया कि कुछ पुलिसकर्मी हाथ जोड़कर उन्हें शांत कराने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन यति अपने आरोपों पर लगातार बोलते रहे।

कलाम को लेकर लगाए गंभीर आरोप

यति नरसिंहानंद ने दावा किया कि अब्दुल कलाम अफजल गुरु के “हमदर्द” थे और उन्होंने मृत्युदंड पाए अफजल के परिवार से मुलाकात कर उसकी दया याचिका दायर कराने में “भूमिका” निभाई। उन्होंने यहां तक कहा कि “इस देश में अब्दुल कलाम से बड़ा कट्टर मुसलमान नहीं हुआ।” इतना ही नहीं, उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार चाहती तो दया याचिका तुरंत आगे बढ़ जाती। उन्होंने उन नेताओं पर भी टिप्पणी की जिन्होंने कलाम को भारत रत्न देने का समर्थन किया था।

यति के पुराने विवाद भी आए चर्चा में

यति नरसिंहानंद पहले भी कई नेताओं, समुदायों और ऐतिहासिक हस्तियों पर आपत्तिजनक बयान दे चुके हैं। इससे पहले उन्होंने महात्मा गांधी को लेकर भी विवादित टिप्पणी की थी, जिसके बाद काफी आलोचना हुई थी।
इस बार उनके बयानों ने नई बहस छेड़ दी है, खासकर इसलिए क्योंकि इस बार निशाने पर वह व्यक्तित्व था, जिसे देश में व्यापक सम्मान प्राप्त है।

पुलिस की सख्ती और राजनीति में हलचल

पुलिस फिलहाल मामले की जांच में जुटी है। यति को दिल्ली जाने से रोकने को उन्होंने सुरक्षा कारणों से आवश्यक बताया। वहीं राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने इन बयानों की आलोचना की है और इसे समाज में नफरत फैलाने की कोशिश करार दिया है।

गाजियाबाद में इस घटना के बाद माहौल तनावपूर्ण तो नहीं, लेकिन चर्चा जरूर गर्म हो गई है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि लगातार विवादों में रहे यति नरसिंहानंद के बयानों पर कार्रवाई कब होगी।

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