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सड़क परियोजना में आदिवासियों को जमीन के साथ भेदभाव? सांसद के दौरे से बढ़ी हलचल

Lohardaga News: सेन्हा प्रखंड का बंसरी गुड़िया टोली इन दिनों एक ऐसे फैसले का इंतजार कर रहा है, जो उसके भविष्य की दिशा तय करेगा। लोहरदगा में बाईपास सड़क बनने जा रही है, और इस सड़क के रास्ते में गांव की करीब 14 एकड़ जमीन

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Lohardaga News: सेन्हा प्रखंड का बंसरी गुड़िया टोली इन दिनों एक ऐसे फैसले का इंतजार कर रहा है, जो उसके भविष्य की दिशा तय करेगा। लोहरदगा में बाईपास सड़क बनने जा रही है, और इस सड़क के रास्ते में गांव की करीब 14 एकड़ जमीन आ रही है। 42 परिवार प्रभावित हैं- और इनमें सौ फीसदी परिवार आदिवासी हैं।

इन्हीं शिकायतों और उम्मीदों को लेकर ग्रामीणों ने लोहरदगा लोकसभा के सांसद सुखदेव भगत को गांव आने का आग्रह किया था। मंगलवार को सांसद गांव पहुंचे, जहां उनका पारंपरिक ढंग से स्वागत किया गया। अखड़ा तक ले जाकर ग्रामीणों ने अपनी बात रखी, और सांसद पूरे ध्यान से सब सुनते रहे।

ग्रामीणों का आरोप: “हम विरोधी नहीं, लेकिन भेदभाव क्यों?”

बैठक में ग्रामीणों ने सबसे पहले अपनी सबसे बड़ी चिंता बताई। उन्होंने कहा कि सरकार बाईपास सड़क के लिए जमीन ले रही है, पर मुआवजे में भारी विसंगति है।

  • बंसरी गुड़िया टोली को 6526 रुपये प्रति डिसमिल

  • सटा हुआ गांव नवदी कोयनार टोली को 22385 रुपये प्रति डिसमिल

दोनों गांव एक-दूसरे से लगे हुए हैं, लेकिन मुआवजे की दर में इतना बड़ा अंतर क्यों? ग्रामीणों के मुताबिक 17 मौजा की जमीन अधिग्रहित हो रही है, लेकिन सबसे कम दर सिर्फ इसी गांव के लिए तय की गई है। ग्रामीणों का कहना है कि यह साफ भेदभाव है। “हम विकास का विरोध नहीं करते”, ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा, “लेकिन सम्मानजनक मुआवजा जरूरी है, नहीं तो हम जमीन नहीं देंगे।”

सांसद सुखदेव भगत का आश्वासन: “आदिवासी जमीन सबसे अनमोल- न्याय मिलेगा”

सांसद सुखदेव भगत ने ग्रामीणों की बातें गौर से सुनीं और साफ कहा कि वह उनके साथ हैं। उन्होंने कहा कि आदिवासियों के लिए जमीन सिर्फ संपत्ति नहीं, जीवन की नींव होती है। उन्होंने यह भी कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि पूरी आदिवासी आबादी की जमीन जाने के बावजूद उन्हें न्यूनतम मुआवजा तय किया गया। सांसद ने गांव में जाकर जमीन का मुआयना किया और कहा – “मैं जांच करवाऊंगा कि दर किसने तय की, किस आधार पर तय की, और सिर्फ इस गांव के साथ कम कीमत क्यों की गई। जरूरत पड़ी तो केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से भी बात करूंगा।”

ग्रामीणों का दर्द: “जरूरत पड़ती है तो जमीन देते हैं, पर धोखा क्यों?”

गांव के बुजुर्गों और महिलाओं ने सांसद को बताया कि उनके पूर्वजों ने हमेशा विकास में सहयोग किया है। सड़क हो, स्कूल हो, गांव ने कभी रुकावट नहीं डाली। लेकिन इस बार उन्हें लग रहा है कि उनके साथ अनुचित व्यवहार किया गया है। कुंडी, बगान मसना जैसे अन्य हिस्सों की जमीन भी परियोजना में जा रही है, लेकिन मुआवजे की दर उन्हें चोट पहुँचा रही है।

मामला अब राजनीति से आगे – न्याय का सवाल

सांसद सुखदेव भगत के आने से ग्रामीणों को उम्मीद तो मिली है, लेकिन असल लड़ाई अब शुरू होने वाली है। वे स्पष्ट कर चुके हैं कि उचित मुआवजे के बिना जमीन नहीं देंगे। सांसद ने भी कहा कि प्रशासन के साथ समन्वय कर इस पूरे मामले में पारदर्शिता लानी होगी। उन्होंने यह भी कहा कि अगर निधि आवंटन या मुआवजा निर्धारण में कोई गलत प्रक्रिया हुई है तो उसे सुधारा जाएगा।

बैठक में आलोक कुमार साहू, सांसद प्रतिनिधि नंदू शुक्ला, पाहन मंगलदास मुंडा, गंगा उरांव, जीतराम उरांव और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। अब सबकी नजर प्रशासन और सांसद की अगली कार्रवाई पर है, क्योंकि यह मामला सिर्फ जमीन का नहीं – विश्वास का भी है।

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