रांची: झारखंड की लचर ग्रामीण व शहरी स्वास्थ्य सेवाओं को पटरी पर लाने और कार्यस्थल से लंबे समय से अनुपस्थित रहने वाले चिकित्सकों पर स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग ने सख्त रुख अपना लिया है। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की अनुशंसा के बाद राज्य के विभिन्न सदर अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC), प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) और अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (APHC) में तैनात किए गए 64 चिकित्सा पदाधिकारी व गैर-शैक्षणिक विशेषज्ञ चिकित्सक अपनी ड्यूटी से अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित पाए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने इस गंभीर लापरवाही पर कड़ा संज्ञान लेते हुए इन सभी चिकित्सकों की सार्वजनिक सूची जारी कर स्पष्टीकरण तलब किया है।
सदर अस्पतालों से लेकर सुदूर प्राथमिक केंद्रों तक फैली लापरवाही
जारी सरकारी सूचना के अनुसार, ड्यूटी से नदारद रहने वालों में केवल सामान्य मेडिकल ऑफिसर ही नहीं, बल्कि विशेषज्ञ सर्जन, नेत्र रोग विशेषज्ञ (Opthalmologist), हड्डी रोग विशेषज्ञ (Orthopedician), स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ (Gynecologist), एनेस्थेटिस्ट, चर्म रोग विशेषज्ञ (Dermatologist) और शिशु रोग विशेषज्ञ (Paediatrician) तक शामिल हैं।
सबसे अधिक मामले संथाल परगना के दुमका जिले से सामने आए हैं, जहाँ सदर अस्पताल के अलावा जरमुंडी, रामगढ़, जामा, शिकारीपाड़ा और लखीमपुर जैसे केंद्रों के एक दर्जन से अधिक चिकित्सक अनुपस्थित हैं। इसके अलावा चतरा, धनबाद, पूर्वी सिंहभूम, गढ़वा, गुमला, हजारीबाग, जामताड़ा, पलामू, रामगढ़, रांची, साहिबगंज, पश्चिमी सिंहभूम, गोड्डा, पाकुड़ और सिमडेगा के विभिन्न अस्पतालों में पदस्थापित डॉक्टर बिना किसी पूर्व सूचना के कार्यस्थल से गायब मिले हैं।
राजधानी रांची के अस्पतालों का भी बुरा हाल
हैरानी की बात यह है कि राज्य मुख्यालय के समीप रांची जिले में भी डॉक्टर अनुपस्थित पाए गए हैं। इनमें सीएचसी बुढ़मू की पीडियाट्रिशियन डॉ. शिल्पी अनामिका एक्का, सीएचसी नामकुम के अंतर्गत पीएचसी नयाभूषुर के मेडिकल ऑफिसर डॉ. अभिनीति सिद्धार्थ और सीएचसी सोनाहातू की मेडिकल ऑफिसर डॉ. मैरी माइकल बाड़ा का नाम प्रमुखता से शामिल है।
सेवा बर्खास्तगी की लटकी तलवार
स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि बिना किसी वैध कारण या अवकाश स्वीकृति के लगातार ड्यूटी से नदारद रहना गंभीर कदाचार और अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है। विभाग ने इन सभी चिकित्सकों को निर्देश दिया है कि वे निर्धारित समयावधि के भीतर उपस्थित होकर विभाग के समक्ष अपना पक्ष स्पष्ट करें। संतोषजनक स्पष्टीकरण न मिलने पर सेवा नियमावली के तहत इन चिकित्सकों के खिलाफ कड़ी विभागीय कार्रवाई, निलंबन अथवा सेवामुक्ति (बर्खास्तगी) की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।





