India News: किंग कोबरा यानी नागराज को एशिया में सबसे खतरनाक सांपों में गिना जाता है। जानकार बताते हैं कि इसके विष से पीड़ित की मौत महज 15 से 20 मिनट में हो सकती है। वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट के अनुसार भारत में सांपों की लगभग 367 प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें से सिर्फ 10 प्रतिशत ही जहरीली होती हैं।

देश में इन अधिकांश सांपों के विष का एंटीवेनम मौजूद है, लेकिन किंग कोबरा के मामले में अब तक कोई प्रभावी एंटीवेनम विकसित नहीं किया गया है। इस सांप का विष अन्य सभी प्रजातियों की तुलना में कहीं अधिक घातक और जटिल माना जाता है। किंग कोबरा का विष न्यूरोटॉक्सिक, हीमोटॉक्सिक और साइटोटॉक्सिक तीनों प्रकार के तत्वों का मिश्रण होता है। इसका असर न केवल तंत्रिका तंत्र को तुरंत प्रभावित करता है, बल्कि रक्त और ऊतकों पर भी गंभीर असर डालता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि किसी खतरे के समय यह सांप एक बार में करीब 420 मिलीग्राम तक विष इंजेक्ट कर सकता है, जो दुनिया के किसी भी सांप के मुकाबले सबसे अधिक है।

यही वजह है कि इसके दंश के बाद मौत का खतरा बेहद तेजी से बढ़ जाता है। जहां “बिग फोर” के नाम से मशहूर चार सांप गेहूंवन (कोबरा), करैत, रसल वाइपर और सॉ स्केल वाइपर के डंसने के बाद मरीज को सामान्यतः 45 मिनट से दो घंटे तक का समय मिल जाता है, वहीं किंग कोबरा के मामले में यह समय घटकर सिर्फ 20 मिनट रह जाता है। यह समय भी कई बार विष की मात्रा और पीड़ित की शारीरिक क्षमता पर निर्भर करता है। यदि समय पर इलाज न मिले तो परिणाम लगभग तय माने जाते हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतने खतरनाक विष के बावजूद भारत में इसका एंटीवेनम क्यों नहीं बनाया गया। विशेषज्ञ बताते हैं कि चूंकि देश में सांप के काटने से होने वाली अधिकांश मौतें “बिग फोर” के कारण होती हैं, इसलिए एंटीवेनम निर्माण इन्हीं पर केंद्रित रहा है।

किंग कोबरा मुख्य रूप से घने जंगलों में पाया जाता है और इंसानों से इसका सामना बेहद कम होता है, जिससे इसके दंश के मामले भी दुर्लभ हैं। यही वजह है कि इस पर अलग से शोध और एंटीवेनम निर्माण को प्राथमिकता नहीं दी गई है। उपचार के मामले में डॉक्टर आमतौर पर कोबरा (गेहूंवन) के एंटीवेनम का सहारा लेते हैं। हालांकि, किंग कोबरा के मामले में विष की मात्रा कहीं अधिक होने के कारण एंटीवेनम की खुराक भी कई गुना बढ़ानी पड़ती है और अन्य सहायक दवाओं के साथ कॉम्बिनेशन में दिया जाता है।

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