World News: जब सर्दियों की ठंडी हवा धरती को छूने लगती है, तब समुद्र की गहराइयों में अब भी गर्मी बची होती है। यही गर्माहट वह ऊर्जा बनती है जिससे चक्रवाती तूफान जन्म लेते हैं। इस समय दक्षिण-पूर्वी बंगाल की खाड़ी में “मोंथा” नामक चक्रवाती प्रणाली तेजी से सक्रिय हो रही है, जिसके चलते तमिलनाडु तट पर ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।
सर्दियों में ही क्यों आते हैं तूफान?
मौसम विशेषज्ञ बताते हैं कि चक्रवात बनने के लिए समुद्र की सतह का तापमान 26 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक होना जरूरी है। सर्दी के शुरुआती महीनों में भले ही वातावरण ठंडा हो, लेकिन समुद्र का तापमान ऊपरी परतों में अभी भी गर्म रहता है। गर्मी से हवा ऊपर उठती है, जिससे कम दबाव बनता है। यह कम दबाव नमी और तेज हवाओं के साथ घूमने लगता है — और इसी प्रक्रिया से पैदा होता है चक्रवात।
पोस्ट-मॉनसून सीजन देता है अनुकूल माहौल
भारत में अक्टूबर से दिसंबर के बीच का समय “पोस्ट-मॉनसून सीजन” कहलाता है। इस दौरान हवा की दिशा और दबाव में तेजी से बदलाव होता है। बंगाल की खाड़ी और अरब सागर के ऊपर बना गर्म पानी तूफान के लिए ईंधन का काम करता है। यही वजह है कि इस समय भारत के तटीय इलाकों — खासतौर पर आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और ओडिशा — में तूफानों की संभावना सबसे ज्यादा रहती है।
सर्द हवाएं नहीं, गर्म समुद्र असली कारण
दरअसल, ठंड सीधे तौर पर तूफान नहीं लाती। बल्कि सर्दी के बीच समुद्र में बची हुई गर्मी और बदलती हवाओं का असंतुलन चक्रवात बनने की मुख्य वजह है। जैसे-जैसे दिसंबर के बाद समुद्र ठंडा होने लगता है, तूफान बनने की संभावना भी घट जाती है।



