रांची: राजधानी के पेट्रोल पंपों पर शुक्रवार को जो नजारा दिखा, उसने न केवल आम जनता की परेशानी बढ़ा दी, बल्कि प्रदेश की राजनीति में भी उबाल ला दिया है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के केंद्रीय महासचिव विनोद पांडेय ने पेट्रोल पंपों पर लगी लंबी कतारों और अफरा-तफरी की स्थिति को लेकर विपक्षी दलों और केंद्र की नीतियों पर जमकर निशाना साधा है।

जनता कतार में, पूंजीपति मुनाफे में

प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए विनोद पांडेय ने तीखे लहजे में कहा कि आज देश की विडंबना यह है कि आम आदमी अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए घंटों लाइन में खड़ा रहने को मजबूर है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह के कृत्रिम संकट या अस्थिरता से सबसे ज्यादा फायदा पूंजीपतियों को हो रहा है। झामुमो नेता के अनुसार, सरकार जनता को राहत देने के बजाय उन्हें लगातार महंगाई, असुरक्षा और आर्थिक संकट की दलदल में धकेल रही है।

कच्चा तेल सस्ता, फिर पेट्रोल महंगा क्यों?

विनोद पांडेय ने अंतरराष्ट्रीय बाजार के आंकड़ों का हवाला देते हुए एक गंभीर सवाल खड़ा किया। उन्होंने कहा कि जब वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है, तो उसका सीधा लाभ देश के नागरिकों तक क्यों नहीं पहुँचाया जा रहा? उन्होंने आरोप लगाया कि एक तरफ तेल कंपनियां रिकॉर्ड तोड़ मुनाफा कमा रही हैं, वहीं दूसरी तरफ मध्यम वर्ग, किसान, मजदूर और युवाओं की जेबें काटी जा रही हैं।

आर्थिक दबाव में हर वर्ग

झामुमो महासचिव ने कहा कि आज देश का छोटा व्यापारी हो या मेहनत-कश किसान, हर कोई आर्थिक अस्थिरता से जूझ रहा है। उन्होंने विपक्ष और केंद्र की नीतियों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि यह स्थिति जनता के धैर्य की परीक्षा लेने जैसी है। रांची के पेट्रोल पंपों पर लगी भीड़ को उन्होंने महज एक कतार नहीं, बल्कि मध्यम वर्ग की बढ़ती हताशा का प्रतीक बताया।

राजनीतिक गलियारों में पांडेय के इस बयान को आगामी चुनावों और जनता के बीच बढ़ती महंगाई को एक बड़ा मुद्दा बनाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। अब देखना यह है कि विपक्ष इन आरोपों पर क्या सफाई देता है और क्या आने वाले दिनों में तेल की कीमतों में किसी राहत की उम्मीद की जा सकती है।

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