World News: दुनिया के सबसे बड़े प्रमाणित तेल भंडार वाले देश, वेनेजुएला की राजनीति में मचे उथल-पुथल के बीच अब डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने एक ऐसा दांव चला है जिसने वैश्विक कूटनीति को हिलाकर रख दिया है। राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद अब अमेरिका ने वेनेजुएला की अंतरिम सरकार को सीधे शब्दों में ‘अल्टीमेटम’ दे दिया है। अमेरिका की यह रणनीति केवल तेल के कुओं तक सीमित नहीं है, बल्कि वह दक्षिण अमेरिका से रूस, चीन, ईरान और क्यूबा के प्रभाव को जड़ से उखाड़ फेंकना चाहता है।
रूस-चीन समेत 4 देशों से ‘तलाक’ की मांग
व्हाइट हाउस ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वेनेजुएला को अपने दशकों पुराने आर्थिक और सुरक्षा संबंधों को भारत के मित्र रूस, चीन, ईरान और क्यूबा के साथ न्यूनतम स्तर पर लाना होगा या उन्हें पूरी तरह समाप्त करना होगा। ह्यूगो शावेज के समय से ही वेनेजुएला अपनी सुरक्षा और वित्तीय स्थिरता के लिए इन देशों पर निर्भर रहा है। अमेरिका का मानना है कि इन देशों को वेनेजुएला के आर्थिक ढांचे से बाहर निकालना उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक है।
तेल उत्पादन की अनुमति बनाम अमेरिकी शर्तें
ट्रंप प्रशासन ने अंतरिम नेता डेल्सी रोड्रिगेज के सामने शर्त रखी है कि वेनेजुएला को तेल निर्यात में अमेरिका को ‘सर्वोच्च प्राथमिकता’ देनी होगी। राष्ट्रपति ट्रंप ने घोषणा की है कि वेनेजुएला अमेरिका को लगभग 30 से 50 मिलियन बैरल तेल की आपूर्ति करेगा, जिसका मूल्य लगभग 2.8 अरब डॉलर है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि वेनेजुएला को अपना तेल उत्पादन बढ़ाने की छूट तभी मिलेगी, जब वह इन ‘भू-राजनीतिक’ शर्तों का पालन करेगा।
वैश्विक ऊर्जा बाजार पर असर
अमेरिकी प्रशासन भले ही कह रहा हो कि उसका उद्देश्य वेनेजुएला पर कब्जा करना नहीं है, लेकिन ट्रंप के बयानों से यह साफ है कि वे देश के विशाल तेल राजस्व को अपने हिसाब से निर्देशित करना चाहते हैं। अगले सप्ताह अमेरिकी तेल कंपनियों के साथ बड़े निवेश पर चर्चा होनी है। यदि वेनेजुएला इन शर्तों को मानता है, तो यह दक्षिण अमेरिका में चीन और रूस जैसे वैश्विक प्रतिद्वंद्वियों के बढ़ते प्रभाव को कम करने की दिशा में अमेरिका की सबसे बड़ी जीत होगी।
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फिलहाल, पूरी दुनिया की नजरें इस पर हैं कि क्या वेनेजुएला की अंतरिम सरकार अपनी घरेलू संप्रभुता को दांव पर लगाकर इन शर्तों के आगे घुटने टेकती है या कोई बीच का रास्ता निकलता है।



