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होर्मुज बना जंग का अखाड़ा: अमेरिका ने तबाह किए ईरान के 16 लड़ाकू जहाज

तेहरान (ईरान) — दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्ग ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ अब पूरी तरह से बारूद के ढेर पर है। बुधवार को अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने एक सनसनीखेज दावा करते हुए बताया कि उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास ईरानी नौसेना के 16 जहाजों

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तेहरान (ईरान) — दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्ग ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ अब पूरी तरह से बारूद के ढेर पर है। बुधवार को अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने एक सनसनीखेज दावा करते हुए बताया कि उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास ईरानी नौसेना के 16 जहाजों को बमबारी कर समुद्र में दफन कर दिया है। अमेरिकी सेना के मुताबिक, ये जहाज इस व्यस्त समुद्री रास्ते में बारूदी सुरंगें (Mines) बिछाने की साजिश रच रहे थे ताकि अंतरराष्ट्रीय व्यापार को ठप किया जा सके।

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस भीषण सैन्य कार्रवाई की पुष्टि करते हुए ईरान को सीधे शब्दों में चेतावनी दी है। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर स्पष्ट किया कि यदि ईरान ने समुद्री मार्ग में बाधाएं डालना बंद नहीं किया, तो उसे इससे भी भयानक नतीजे भुगतने होंगे। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका उसी घातक तकनीक का उपयोग कर रहा है जिससे वह ड्रग तस्करों का सफाया करता है।

दुनिया का व्यापार ठप, बीमा कंपनियों ने हाथ खींचे — इस सैन्य टकराव का सबसे घातक असर वैश्विक कारोबार पर पड़ा है। 10 मार्च तक होर्मुज मार्ग से कमर्शियल जहाजों की आवाजाही लगभग बंद हो चुकी है। युद्ध के बढ़ते जोखिम को देखते हुए दुनिया की बड़ी बीमा कंपनियों ने जहाजों का इंश्योरेंस करने से मना कर दिया है। इसके चलते ‘मार्सक’ जैसी दिग्गज कंपनियों ने अपने जहाजों का रास्ता बदल दिया है। अब व्यापारिक जहाज ‘केप ऑफ गुड होप’ के लंबे और महंगे रास्ते से गुजर रहे हैं, जिससे माल ढुलाई का समय और खर्च दोनों दोगुने हो गए हैं। इस संघर्ष में अब तक 8 नाविकों की जान जा चुकी है।

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कच्चे तेल की कीमतों में लगी आग होर्मुज में छिड़ी इस जंग ने तेल बाजार को हिलाकर रख दिया है। 9 मार्च को कच्चे तेल की कीमतें उछलकर 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं, जो वर्तमान में 90 डॉलर के आसपास बनी हुई हैं। चूंकि दुनिया के कुल तेल उपभोग का 20 प्रतिशत इसी रास्ते से गुजरता है, इसलिए भारत, चीन और जापान जैसी एशियाई अर्थव्यवस्थाओं की ऊर्जा सुरक्षा पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है।

भारत की बढ़ी चिंता, जयशंकर ने की बात संकट को भांपते हुए भारत ने अपनी कूटनीतिक सक्रियता तेज कर दी है। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची से फोन पर लंबी बात की और भारत की गहरी चिंताओं से अवगत कराया। भारत का मुख्य सरोकार तेल और गैस की निर्बाध सप्लाई सुनिश्चित करना है, क्योंकि इस मार्ग के बंद रहने का सीधा असर आम भारतीयों की जेब और देश की इकोनॉमी पर पड़ेगा।

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