Washington, (USA) | एजेंसी —
ईरान और अमेरिका के बीच चल रहा सैन्य संघर्ष अब एक खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। जहां एक ओर मोर्चे पर भीषण बमबारी हो रही है, वहीं दूसरी ओर अमेरिकी सैन्य नेतृत्व के भीतर बड़ी उथल-पुथल शुरू हो गई है। पेंटागन ने अचानक अमेरिकी सेना के चीफ ऑफ स्टाफ, जनरल रैंडी जॉर्ज के इस्तीफे की घोषणा कर दी है। रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ द्वारा लिए गए इस ‘जबरन इस्तीफे’ ने वाशिंगटन के गलियारों में वफादारी के सवाल खड़े कर दिए हैं।
बताया जा रहा है कि जनरल रैंडी जॉर्ज, जो बाइडेन प्रशासन के दौरान नियुक्त हुए थे, उन्हें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों के प्रति कम वफादार माना जा रहा था। शीर्ष प्रवक्ता शॉन पार्नेल द्वारा घोषित यह कदम रक्षा मंत्री हेगसेथ द्वारा वरिष्ठ सैन्य नेताओं की एक दर्जन से अधिक बर्खास्तगियों की श्रृंखला का हिस्सा है। अगस्त 2023 में पदभार संभालने वाले जनरल जॉर्ज का कार्यकाल चार साल का था, लेकिन उन्हें बीच में ही सेवानिवृत्त कर दिया गया है।
ईरानी पुल पर हमला: प्रकृति दिवस मना रहे लोग बने शिकार
मैदान-ए-जंग की बात करें तो अमेरिका और इजराइल ने ईरान की राजधानी तेहरान सहित दर्जनों ठिकानों पर हवाई हमले तेज कर दिए हैं। ताजा मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अल्बोरज प्रांत में एक निर्माणाधीन ‘बी1 पुल’ को निशाना बनाकर किए गए अमेरिकी हमले में कम से कम 8 आम नागरिकों की मौत हो गई और करीब 100 लोग घायल हुए हैं।
दुखद पहलू यह है कि ये लोग पास ही ‘प्रकृति दिवस’ मनाने के लिए इकट्ठा हुए थे। राष्ट्रपति ट्रंप ने इस पुल को ईरान का सबसे बड़ा पुल बताते हुए सोशल मीडिया पर चेतावनी दी है कि “अभी और भी हमले होने बाकी हैं।” ईरानी अधिकारियों ने इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए इसे नागरिक बुनियादी ढांचे पर जानबूझकर किया गया हमला (War Crime) करार दिया है।
कौन थे जनरल रैंडी जॉर्ज?
जनरल रैंडी जॉर्ज वेस्ट प्वाइंट से स्नातक और एक अनुभवी पैदल सेना अधिकारी रहे हैं। उन्होंने खाड़ी युद्ध के साथ-साथ इराक और अफगानिस्तान में भी अमेरिकी सेना का नेतृत्व किया था। वे पूर्व रक्षा सचिव लॉयड ऑस्टिन के शीर्ष सहयोगी भी रह चुके थे। विशेषज्ञों का मानना है कि युद्ध के बीच इस तरह शीर्ष सैन्य नेतृत्व को बदलना जोखिम भरा हो सकता है, लेकिन ट्रंप प्रशासन सेना के भीतर पूरी तरह अपनी विचारधारा वाले लोगों को बैठाने की रणनीति पर काम कर रहा है।
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