Ranchi : झारखंड विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान गुरुवार को ओबीसी आरक्षण शून्य होने का मुद्दा जोरदार तरीके से उठा। भाजपा विधायकों कुशवाहा शशिभूषण मेहता और देवेंद्र कुंवर ने गैर-संकल्प के तहत इस मामले को सदन में उठाते हुए सरकार से जवाब की मांग की। इस पर विभाग की ओर से प्रभारी मंत्री दीपक बिरूआ, सुदिव्य कुमार और राधाकृष्ण किशोर ने क्रमवार जवाब दिया।
विधायक देवेंद्र कुंवर ने कहा कि संथाल परगना प्रमंडल में पिछड़ा और अतिपिछड़ा वर्ग कुल आबादी का 60 प्रतिशत से अधिक है। ऐसे में कई जिलों में ओबीसी आरक्षण शून्य होने से इस बड़े समुदाय का अस्तित्व खतरे में पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से पूछा कि इस गंभीर स्थिति का समाधान कब तक होगा।
विधायक कुशवाहा शशिभूषण मेहता ने कहा कि झारखंड में ओबीसी की आबादी लगभग 55 प्रतिशत है, लेकिन उन्हें वर्तमान में केवल 14 प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिल रहा है। उन्होंने कहा कि कई जिलों में ओबीसी आरक्षण शून्य कर दिया गया है, जो इस वर्ग के अधिकारों पर सीधा प्रहार है। कुशवाहा ने यह भी याद दिलाया कि हेमंत सरकार ने चुनावी घोषणा पत्र में ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण देने का वादा किया था।
मामले पर जवाब देते हुए प्रभारी मंत्री दीपक बिरूआ ने कहा कि 2022 में कोर्ट के निर्णय को देखते हुए राज्य सरकार ने ओबीसी आरक्षण बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने की पहल की थी, लेकिन बाद में इस पर अदालत का हस्तक्षेप हुआ। उन्होंने कहा कि सरकार ने केंद्र सरकार से ओबीसी आरक्षण बढ़ाने की अनुमति मांगी है। जैसे ही केंद्र से रिपोर्ट आएगी, राज्य सरकार आरक्षण को पुनः 27 प्रतिशत कर देगी।
इस पर विधायक कुशवाहा ने तीखी प्रतिक्रिया दी और कहा कि चुनाव के समय सरकार केंद्र सरकार का हवाला नहीं दे रही थी, तो अब क्यों बार-बार केंद्र का हवाला दिया जा रहा है? उन्होंने पूछा कि सरकार बताये कि यह प्रक्रिया कब तक पूरी होगी।
बहस के दौरान प्रभारी मंत्री सुदिव्य कुमार ने कहा कि बाबूलाल मरांडी ने अपने कार्यकाल में ओबीसी आरक्षण को 27 प्रतिशत से घटाकर 14 प्रतिशत किया था और तब उन्होंने किसी से पूछकर यह निर्णय नहीं लिया। उनके बोलते समय स्पीकर ने हस्तक्षेप कर मामला शांत कराया।
अंत में मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि जैसे सदस्य कुशवाहा इस मुद्दे पर गंभीर हैं, वैसे ही राज्य सरकार भी ओबीसी आरक्षण के मामले पर अत्यधिक चिंतित है। उन्होंने कहा कि हेमंत सरकार जल्द ही इस पर ठोस और सकारात्मक निर्णय लेगी।



