World News: जेनेवा से जारी हुई संयुक्त राष्ट्र की ताज़ा रिपोर्ट ने दुनिया भर में महिलाओं की सुरक्षा के हालात पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। रिपोर्ट बताती है कि दुनिया में औसतन हर दस मिनट में एक महिला या लड़की अपने ही साथी या परिवार के किसी सदस्य द्वारा हत्या का शिकार हो रही है। साल भर में यह संख्या 83,000 तक पहुंच गई, जो खुद में एक डरावना आंकड़ा है।

अधिकतर हत्याएं घर की चारदीवारी के भीतर

यूएनओडीसी और यूएन विमेन की इस संयुक्त रिपोर्ट में कहा गया है कि 83,000 महिलाओं और लड़कियों की हत्याओं में से लगभग 50,000 हत्याएँ उनके पति, पूर्व साथी या परिवार के लोगों ने कीं। यानी कुल हत्याओं का करीब 60 प्रतिशत मामला घर के भीतर का है।
इसके मुकाबले पुरुषों की हत्याओं में सिर्फ 11 प्रतिशत मामलों में पारिवारिक या पार्टनर की भूमिका पाई गई। यह अंतर बताता है कि घरेलू हिंसा की सबसे भारी कीमत महिलाएँ ही चुकाती हैं।

फेमिसाइड को बताया वैश्विक महामारी

रिपोर्ट ने फेमिसाइड—यानी लैंगिक आधार पर महिलाओं की हत्या—को तेज़ी से फैलती वैश्विक महामारी करार दिया है। कई देशों में पीड़ित महिलाएँ शिकायत तक दर्ज नहीं करा पातीं, ऐसे में विशेषज्ञ मानते हैं कि वास्तविक संख्या रिपोर्ट में बताए गए आंकड़ों से कहीं अधिक हो सकती है।

कोविड-19 के बाद बढ़ा संकट

संयुक्त राष्ट्र की पिछली रिपोर्टों में भी चेताया गया था कि महामारी और लॉकडाउन के दौरान घरेलू हिंसा के मामलों में अचानक उछाल देखा गया था। बंद घरों में तनाव, बेरोजगारी और सामाजिक दबाव जैसे कारणों ने महिलाओं के खिलाफ हिंसा को और खतरनाक बना दिया। आज भी उन हालातों के असर साफ दिख रहे हैं, खासकर विकासशील देशों में।

यूएन ने देशों से की कड़ी कार्रवाई की अपील

रिपोर्ट में सरकारों से कहा गया है कि वे घरेलू हिंसा कानूनों को कड़ा बनाएं और उन्हें ईमानदारी से लागू करें। पीड़ित महिलाओं को तुरंत सुरक्षा, हेल्पलाइन, आश्रय और कानूनी सहायता देने की व्यवस्था मज़बूत की जाए। यूएन का साफ संदेश है—अगर समाज और सरकार दोनों मिलकर कदम नहीं उठाए, तो महिलाओं के खिलाफ हिंसा का यह संकट और गहरा हो जाएगा।

सबसे बड़ा खतरा वहीं, जहां महिला को सबसे सुरक्षित महसूस होना चाहिए

रिपोर्ट का निष्कर्ष बेहद मार्मिक है। घर, जिसे सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है, आज लाखों महिलाओं के लिए वही जगह जानलेवा साबित हो रही है। यही वजह है कि यूएन ने इसे मानवाधिकारों से जुड़ा गंभीर वैश्विक खतरा बताया है।

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