World News: यूक्रेन और रूस के बीच जारी युद्ध को लगभग तीन साल हो चुके हैं। इस बीच यूक्रेन को एक ऐसी सैन्य मदद मिली है, जो आने वाले महीनों में उसकी रक्षा क्षमता को पूरी तरह बदल सकती है। फ्रांस और यूक्रेन के बीच 100 राफेल फाइटर जेट की ऐतिहासिक डील पर समझौता हुआ है। यह समझौता फ्रांस के विला कुबले सैन एयरबेस पर राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की की मौजूदगी में हुआ।
डील के मुताबिक राफेल जेट 2026 से मिलना शुरू होंगे और अगले दस साल में सौ जेट यूक्रेन की सेना को सौंप दिए जाएंगे। इसके साथ ही फ्रांस कई और सिस्टम भी देगा, जिनमें आठ सैम पीटी एयर डिफेंस सिस्टम, एडवांस रडार और एयर टू एयर मिसाइलें शामिल हैं।
राफेल से यूक्रेन की हवाई शक्ति में बड़ा उछाल
राफेल के आने से यूक्रेन की हवाई क्षमता में भारी बदलाव होने वाला है। रूस लगातार मिसाइल और ड्रोन हमलों से यूक्रेन को निशाना बना रहा है। अब राफेल की मदद से यूक्रेन न सिर्फ अपनी रक्षा मजबूत कर पाएगा, बल्कि अधिक सटीकता और शक्ति के साथ जवाबी हमला भी कर सकेगा।
राफेल जेट रूस के उन्नत एसयू–35 का मुकाबला करने में सक्षम माना जाता है। पुराने सोवियत दौर के जेट्स की तुलना में राफेल बेहद एडवांस तकनीक, एवियोनिक्स और सुरक्षा सिस्टम से लैस है। इसी वजह से इस सौदे को यूक्रेन ने अपने सैन्य इतिहास का सबसे अहम कदम बताया है।
मैक्रों बोले, “यूक्रेन मजबूत होगा तो रूस हमला करने की हिम्मत नहीं करेगा”
फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रों ने इस समझौते को समय की जरूरत बताया। उनका कहना है कि यूक्रेन को मजबूत किए बिना यूरोप में शांति कायम नहीं रह सकती। उन्होंने साफ कहा कि अगर यूक्रेन की सैन्य क्षमता बढ़ेगी, तो रूस आक्रमण की स्थिति में पीछे हटेगा।
फरवरी 2022 में रूस के हमले के बाद से जेलेंस्की यह नौवीं बार फ्रांस पहुंचे थे। इस यात्रा का ध्यान सिर्फ एक ही बात पर था—यूक्रेन की हवाई सुरक्षा को मजबूत करना। रूस हाल के दिनों में यूक्रेन के पावर प्लांट, ऊर्जा ढांचे और शहरों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले कर रहा है।
युद्ध कब खत्म होगा? जवाब अभी भी दूर
रूस और यूक्रेन के बीच जंग खत्म होने के आसार अब भी नजर नहीं आ रहे। हर नया कदम संघर्ष को और तीखा ही कर रहा है। हालांकि राफेल डील ने यूक्रेन के मनोबल को ऊपर जरूर पहुंचाया है और रूस के लिए नई चुनौती खड़ी कर दी है।



