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Home»Social/Interesting»3 बार रुकी दिल की धड़कन, तकनीकी रूप से हुई मौत; फिर भी जिंदा है ये डाकिया!
Social/Interesting

3 बार रुकी दिल की धड़कन, तकनीकी रूप से हुई मौत; फिर भी जिंदा है ये डाकिया!

By Samsul HaqueJune 5, 20264 Mins Read
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London, (UK): यूनाइटेड किंगडम (UK) से एक बेहद हैरान और विस्मित कर देने वाली चिकित्सा घटना सामने आई है। यहां रॉयल मेल (रॉयल डार्क सेवा) में काम करने वाले एक कर्मठ डाक कर्मचारी कार्ल लॉकवुड का दिल एक या दो बार नहीं, बल्कि तीन बार धड़कना पूरी तरह बंद हो गया था। मेडिकल रिकॉर्ड्स के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वे तकनीकी रूप से तीन बार मौत के मुंह में समा चुके थे, लेकिन जांबाज डॉक्टरों ने अपनी सूझबूझ और आधुनिक चिकित्सा से हर बार उन्हें वापस जिंदगी की राह पर लाकर खड़ा कर दिया। अब कार्ल पूरी तरह स्वस्थ हैं और दोबारा अपने काम पर लौट चुके हैं।

ड्यूटी के दौरान गिरा काल का साया

यह पूरी घटना साल 2019 की है, जब कार्ल रोजाना की तरह अपनी सरकारी ड्यूटी पर तैनात थे। अचानक काम के दौरान ही उन्हें एक भयंकर कार्डियक अरेस्ट (Cardiac Arrest) आया और वे वहीं बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़े। अस्पताल ले जाने और वहां इलाज प्रक्रिया के दौरान उनका दिल तीन बार पूरी तरह काम करना बंद कर चुका था, जिससे उनकी जान जाने का खतरा शत-प्रतिशत बढ़ गया था। डॉक्टरों ने हार न मानते हुए लगातार कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (CPR) और बिजली के झटकों (Defibrillator) की मदद से उनके दिल को दोबारा धड़काने में सफलता हासिल की, जो किसी चमत्कार से कम नहीं था। इस पूरी घटना ने न सिर्फ उनके परिवार को भावुक कर दिया बल्कि बड़े-बड़े डॉक्टरों को भी हैरत में डाल दिया, क्योंकि अमूमन ऐसे क्रिटिकल मामलों में इंसानी जीवन के बचने की संभावना न के बराबर होती है।

फिटनेस के बावजूद क्यों आया अटैक?

हैरानी की बात यह है कि कार्ल कोई बीमार या शारीरिक रूप से कमजोर व्यक्ति नहीं थे। वे बेहद फिट थे और एक बेहद सक्रिय जीवनशैली जीते थे। डाकिया होने के कारण वे रोजाना कई किलोमीटर की लंबी दूरी पैदल तय करते थे, नियमित भारी व्यायाम करते थे और उन्हें पहाड़ों पर ट्रैकिंग करने व ‘अल्ट्रा रनिंग’ (मैराथन से भी लंबी दौड़) का बेहद शौक था। हालांकि, वे पहले से ‘एट्रियल फिब्रिलेशन’ (Atrial Fibrillation) नाम की दिल की एक छिपी बीमारी से ग्रसित थे, जिसमें दिल की धड़कन सामान्य ताल में नहीं चलती है। इसके बावजूद वे डॉक्टरों की सलाह पर नियमित दवाइयां ले रहे थे और सामान्य जीवन बिता रहे थे, इसलिए उन्हें कभी भी अपने साथ ऐसे भयानक हादसे का रत्ती भर भी अंदाजा नहीं था।

दोस्त के सीपीआर (CPR) ने बचाई जान

कार्ल ने अपनी इस चमत्कारिक वापसी पर बात करते हुए बताया कि उन्हें कभी अंदाजा नहीं था कि खुद को इतना फिट रखने के बाद भी उनके साथ ऐसा जानलेवा हादसा हो सकता है। कार्ल के मुताबिक, “अगर उस दिन मेरे सहकर्मी दोस्त ने मुझे तुरंत जमीन पर गिरते हुए न देखा होता और प्राथमिक उपचार न दिया होता, तो शायद मैं आज जिंदा नहीं होता।” कार्ल के दोस्त ने बिना घबराए एम्बुलेंस के पहुंचने तक लगातार उनकी छाती को दबाकर सीपीआर (CPR) दिया। इसी त्वरित सूझबूझ की वजह से कार्ल के शरीर और दिमाग में ऑक्सीजन युक्त रक्त का संचार लगातार बना रहा, जिससे उनके मस्तिष्क को कोई गंभीर या स्थायी नुकसान नहीं पहुंचा। डॉक्टरों का भी यही मानना है कि आपातकाल में सही समय पर दिया गया सीपीआर कई बार मौत और जिंदगी के बीच सबसे बड़ा सुरक्षा कवच साबित होता है।

दूसरी जिंदगी में आया बड़ा बदलाव, अब दूसरों को मिलेगी मदद

पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद कार्ल ने अपनी दिनचर्या और काम करने के तरीके में कई बड़े व्यावहारिक बदलाव किए हैं। अब वे पहले की तरह भारी बैग उठाकर पैदल डाक बांटने के बजाय रॉयल मेल की वैन चलाकर पार्सल डिलीवर करने का हल्का काम करते हैं। वे अपनी इस मिली हुई “दूसरी जिंदगी” को लेकर ईश्वर और डॉक्टरों के प्रति बेहद आभारी हैं और अब अपनी दिल की सेहत का खास ख्याल रखते हैं।

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कार्ल की इस रोंगटे खड़े कर देने वाली प्रेरक कहानी से प्रभावित होकर ब्रिटेन के बड़े मेडिकल संस्थान ‘फार्मेसी2यू’ (Pharmacy2U) ने अब रॉयल मेल के साथ मिलकर डाक कर्मचारियों के लिए एक विशेष स्वास्थ्य जागरूकता अभियान की शुरुआत की है। इस अनूठी पहल के तहत विभाग के एक लाख से अधिक कर्मचारियों को एक ‘डिजिटल सेल्फ-टेस्ट किट’ पूरी तरह मुफ्त दी जा रही है। इस किट के माध्यम से कर्मचारी बिना अस्पताल भागे सिर्फ 10 मिनट में अपने कोलेस्ट्रॉल स्तर और दिल की सेहत की सटीक जांच खुद घर पर कर सकेंगे।

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