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Jamshedpur: पूर्वी सिंहभूम जिले के सुंदरनगर थाना क्षेत्र के नांदूप गांव में सोमवार को यूरेनियम कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (यूसील) की तुरामडीह माइंस परियोजना को लेकर लंबे समय से चल रहा असंतोष खुलकर सामने आ गया। विस्थापन, पुनर्वास और रोजगार जैसे मुद्दों को लेकर गांव पहुंचे झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा को ग्रामसभा के एक वर्ग के विरोध का सामना करना पड़ा। विरोध कर रहे ग्रामीणों ने नारेबाजी की और प्रतीकात्मक रूप से उनका पुतला भी फूंका।
ग्रामीणों और ग्रामसभा प्रतिनिधियों का आरोप है कि नांदूप सहित आसपास के कई गांव यूसील की माइंस परियोजना से प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हुए हैं। उनका कहना है कि परियोजना शुरू होने के समय स्थानीय लोगों को रोजगार, बेहतर पुनर्वास और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के कई वादे किए गए थे, लेकिन वर्षों बाद भी अधिकांश आश्वासन अधूरे हैं। ग्रामीणों ने यह भी कहा कि यह इलाका पांचवीं अनुसूचित क्षेत्र में आता है, इसके बावजूद स्थानीय आदिवासी समुदाय के अधिकारों और पारंपरिक व्यवस्थाओं की अनदेखी की जा रही है।
वहीं, अर्जुन मुंडा ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि उनका उद्देश्य केवल प्रभावित परिवारों की समस्याओं को सरकार और यूसील प्रबंधन के समक्ष मजबूती से उठाना है। उन्होंने बताया कि प्रबंधन के साथ हुई बातचीत में स्थानीय युवाओं को रोजगार देने, विस्थापित परिवारों के पुनर्वास, लंबित मामलों के समाधान और पूर्व में हुए समझौतों को लागू करने की मांग रखी गई है। उनके अनुसार कुछ लोगों द्वारा लगाए जा रहे आरोप तथ्यात्मक नहीं हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि हाल ही में विस्थापित समिति ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर यूसील प्रबंधन को ज्ञापन भी सौंपा था, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है। इससे प्रभावित परिवारों में नाराजगी लगातार बढ़ रही है।
विस्थापितों की प्रमुख मांगों में स्थानीय लोगों को ठेका कार्यों में प्राथमिकता, पुराने मजदूरों की सेवा सुरक्षा, बर्खास्त कर्मियों या उनके आश्रितों की पुनर्नियुक्ति, लंबित बहाली प्रक्रिया को पूरा करना, समुचित पुनर्वास, धार्मिक स्थलों का पुनर्निर्माण, मार्केट कॉम्प्लेक्स में दुकान आवंटन, सड़क प्रकाश व्यवस्था, पेयजल और बिजली सुविधाओं का विस्तार शामिल हैं। इसके अलावा बच्चों के लिए निःशुल्क प्रतियोगी परीक्षा कोचिंग, आदिवासी भाषा और संस्कृति के संरक्षण, लाको बोदरा की प्रतिमा स्थापना, ब्लास्टिंग से क्षतिग्रस्त मकानों के मुआवजे तथा प्रदूषण नियंत्रण की भी मांग की जा रही है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। फिलहाल ग्रामसभा और पूर्व मुख्यमंत्री के अलग-अलग दावों के बीच यह मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब सभी की नजर प्रशासन और यूसील प्रबंधन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है।

