World News: गाजा में महीनों से चल रहे संघर्ष को समाप्त करने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 20 सूत्रीय शांति प्रस्ताव पेश किया है। इस योजना के तहत हमास से हथियार डालने और आत्मसमर्पण करने की मांग की गई है। बदले में फिलिस्तीनियों के लिए मानवीय मदद और गाजा के पुनर्निर्माण का वादा किया गया है।
इस्लामिक देशों ने दिया समर्थन
ट्रंप की इस योजना को ज्यादातर इस्लामिक देशों का समर्थन मिल गया है। जॉर्डन, सऊदी अरब, मिस्र, कतर, तुर्की, पाकिस्तान, इंडोनेशिया और संयुक्त अरब अमीरात ने एक संयुक्त बयान जारी कर कहा कि वे इस प्रस्ताव का स्वागत करते हैं और इसके कार्यान्वयन के लिए अमेरिका और अन्य पक्षों के साथ सहयोग करेंगे। इन देशों ने गाजा के पुनर्निर्माण और फिलिस्तीनियों के विस्थापन को रोकने की प्राथमिकता बताई।
हमास असमंजस में
हालांकि हमास ने अब तक इस प्रस्ताव पर अपनी सहमति नहीं दी है। संगठन का कहना है कि वे चर्चा और विचार मंथन के बाद ही कोई निर्णय लेंगे। हमास के लिए सबसे बड़ी चुनौती आत्मसमर्पण और हथियार डालने की शर्त है, जिस पर उसके नेताओं ने अभी चुप्पी साध रखी है। गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक अब तक वहां की जंग में 66 हजार से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय का रुख
शांति प्रस्ताव का वैश्विक समुदाय ने भी स्वागत किया है। कई देशों ने इसे गाजा और पूरे पश्चिम एशिया क्षेत्र में स्थायी शांति लाने का उपाय बताया। इस बीच भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ट्रंप की पहल का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि यह योजना फिलिस्तीनी और इजरायली लोगों के साथ-साथ पूरे क्षेत्र के लिए शांति, सुरक्षा और विकास का रास्ता दिखाती है।
क्या बदल पाएगा हालात?
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि हमास इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लेता है तो गाजा में लंबे समय से जारी हिंसा पर रोक लग सकती है। मगर आत्मसमर्पण की शर्त को मानना उसके लिए सबसे बड़ा निर्णय होगा। आने वाले दिनों में इस पहल का असर स्पष्ट होगा।



