फॉण्ट कनवर्टर NEW

सरकारी अस्पताल में इलाज गायब, हेपेटाइटिस मरीजों की जिंदगी खतरे में

Chatra News: सदर अस्पताल में हेपेटाइटिस से पीड़ित मरीजों के लिए डायलेसिस की सुविधा कागजों तक सिमट कर रह गई है। अस्पताल में दो-दो एजेंसी हंस फाउंडेशन और संजीवनी के साथ एमओयू होने के बावजूद मरीजों का डायलेसिस नहीं किया जा रहा, जिससे दर्जनों मरीज

अपनी भाषा में पढ़ें

Chatra News: सदर अस्पताल में हेपेटाइटिस से पीड़ित मरीजों के लिए डायलेसिस की सुविधा कागजों तक सिमट कर रह गई है। अस्पताल में दो-दो एजेंसी हंस फाउंडेशन और संजीवनी के साथ एमओयू होने के बावजूद मरीजों का डायलेसिस नहीं किया जा रहा, जिससे दर्जनों मरीज गंभीर परेशानी में हैं।

डायलेसिस नहीं होने के कारण मरीजों की हालत दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही है। मजबूरी में मरीजों को निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है, जहां महंगे खर्च के कारण गरीब व मध्यम वर्ग के मरीज इलाज से वंचित हो रहे हैं। ज्ञात हो कि डायलेसिस जीवन रक्षक प्रक्रिया है। इसमें थोड़ी भी देरी मरीज की जान पर भारी पड़ सकती है। ऐसे में सदर अस्पताल में मशीन होते हुए भी मरीजों को इलाज से वंचित रखना, स्वास्थ्य व्यवस्था की संवेदनहीनता को उजागर करता है।

मरीजों का सवाल – जाएं तो जाएं कहां?

अस्पताल पहुंचने वाले मरीज और उनके परिजन सवाल उठा रहे हैं कि जब सरकारी अस्पताल में मशीन और संसाधन मौजूद हैं, तो फिर डायलेसिस क्यों नहीं हो रहा? क्या गरीब मरीजों की जान की कोई कीमत नहीं?

सूत्रों के अनुसार, यह स्थिति डायलेसिस इंचार्ज की लापरवाही के कारण बनी हुई है। समय पर व्यवस्था नहीं होने और मरीजों की अनदेखी से अस्पताल प्रबंधन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

सबसे हैरानी की बात यह है कि अब तक इस गंभीर मामले पर किसी भी जिम्मेदार अधिकारी की नजर नहीं पड़ी है। इस मामले में मरीजों और सामाजिक संगठनों ने डीसी, सिविल सर्जन (सीएस) से अविलंब संज्ञान लेने की मांग की है।

प्रशासन से मांग

तत्काल डायलेसिस सेवा बहाल की जाए। लापरवाह कर्मियों पर कार्रवाई हो। हेपेटाइटिस व किडनी मरीजों को नियमित इलाज सुनिश्चित किया जाए।

WhatsApp Group जुड़ने के लिए क्लिक करें 👉 Join Now
Facebook
X
Threads
WhatsApp
Telegram