Ranchi : झारखंड विधानसभा के शीतकालीन सत्र के चौथे दिन की कार्यवाही कई महत्वपूर्ण फैसलों के कारण बेहद खास रही। बुधवार को सदन ने एक ओर जहां चार निजी विश्वविद्यालयों से जुड़े पुराने विधेयकों को वापस लेने का निर्णय लिया, वहीं दूसरी ओर बहुप्रतीक्षित “झारखंड पर्यटन विकास और निबंधन (संशोधन) विधेयक–2025” को विस्तृत बहस के बाद पारित कर दिया। सरकार के अनुसार यह कदम राज्य में पर्यटन क्षेत्र के बेहतर प्रबंधन और नई व्यवस्था लागू करने की दिशा में उठाया गया एक बड़ा कदम है।

सदन में बताया गया कि देश और राज्य स्तर पर निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना से जुड़े नियमों, मानकों और प्रक्रियाओं में व्यापक बदलाव किए गए हैं। इसी वजह से राज्य सरकार ने पहले से पारित विधेयकों को वापस लेकर उन्हें नए प्रावधानों के अनुरूप फिर से तैयार करने का फैसला लिया है। जिन विधेयकों को वापस लिया गया, उनमें सी. वी. रमण ग्लोबल विश्वविद्यालय विधेयक-2023, आरोग्यम इंटरनेशनल विश्वविद्यालय विधेयक-2023, जैन विश्वविद्यालय विधेयक-2023 और शाइन नेशनल विश्वविद्यालय विधेयक-2023 शामिल हैं। सरकार ने स्पष्ट किया कि ये सभी विधेयक अब नए नियमों के अनुसार दोबारा लाए जाएंगे।

इस दौरान विधानसभा अध्यक्ष रवीन्द्र नाथ महतो ने बताया कि बीते पांच दिसंबर से अब तक सदन में कुल बारह निवेदन स्वीकार किए जा चुके हैं, जिन्हें संबंधित विभागों को आगे की कार्रवाई के लिए भेजा जाएगा।

सत्र के दूसरे पाली में दोपहर 2 बजकर 9 मिनट पर जैसे ही कार्यवाही शुरू हुई, पर्यटन संशोधन विधेयक पर चर्चा का दौर शुरू हो गया। विपक्ष और सत्ता पक्ष के विधायकों ने अपने-अपने क्षेत्रों के अनुभव साझा किए और कई अहम सुझाव रखे। भाजपा विधायक राज सिन्हा ने धनबाद के भटिंडा फॉल का उदाहरण देते हुए कहा कि यह स्थल कभी पर्यटन का बड़ा केंद्र हुआ करता था, जहां फिल्म शूटिंग से लेकर बड़ी संख्या में पर्यटकों की आवाजाही होती थी। उन्होंने क्षेत्र की वर्तमान बदहाली पर चिंता जताते हुए स्थानीय गोताखोरों को सहयोग देने, बंद खदानों के सौंदर्यीकरण और विधेयक को प्रवर समिति में भेजने की मांग की।

विधायक नवीन जायसवाल ने सुझाव दिया कि जिन विधानसभा क्षेत्रों में प्रमुख पर्यटन स्थल स्थित हैं, वहां के विधायकों को संबंधित पर्यटन समितियों में शामिल किया जाना चाहिए, ताकि योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन हो सके। वहीं, विधायक जयराम महतो ने यह मुद्दा उठाया कि कुछ पर्यटन स्थल दो जिलों की सीमाओं में आते हैं, ऐसे में प्रशासनिक समन्वय के लिए विशेष प्रावधान किए जाने चाहिए।

सभी सुझावों के बाद सरकार की ओर से प्रभारी मंत्री सुदिव्य कुमार ने विधेयक का बचाव किया। उन्होंने कहा कि सरकार का मानना है कि एक छोटी, सक्षम और स्पष्ट जिम्मेदारी वाली समिति से पर्यटन स्थलों का प्रबंधन अधिक प्रभावी ढंग से हो सकेगा। इसी उद्देश्य से नए संशोधन में जिला स्तर पर एक पर्यटन प्राधिकरण के गठन का प्रावधान किया गया है, जो पर्यटन क्षेत्रों के रखरखाव, सुरक्षा और व्यवस्था की जिम्मेदारी निभाएगा।

उन्होंने बताया कि इस प्राधिकरण के अध्यक्ष जिला के उपायुक्त होंगे और जिला पर्यटन पदाधिकारी को कार्यान्वयन की जिम्मेदारी दी जाएगी। इसके तहत पर्यटन स्थलों में प्रवेश करने वाले वाहनों से कर वसूला जाएगा, जिससे विभाग के राजस्व में वृद्धि होगी। साथ ही अतिक्रमण हटाने, पार्किंग की व्यवस्था करने और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर आर्थिक दंड लगाने का अधिकार भी दिया गया है। सरकार के अनुसार इन प्रावधानों के कारण विधेयक को चयन समिति में भेजने की आवश्यकता नहीं है।

अंततः विधानसभा अध्यक्ष ने विधेयक को सदन की मंजूरी दी और कार्यवाही को दोपहर 2 बजकर 40 मिनट पर 11 दिसंबर की सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया।

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