Chakradharpur News: पश्चिमी सिंहभूम जिले के चक्रधरपुर स्थित कल्याण विभाग के आदिवासी कन्या छात्रावास की बदहाल स्थिति एक बार फिर उजागर हुई है। सोमवार को छात्रावास भवन की छत का एक हिस्सा अचानक भरभराकर गिर गया। संयोगवश घटना के समय वहां कोई छात्रा मौजूद नहीं थी, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। हालांकि इस घटना के बाद छात्राओं और उनके अभिभावकों में दहशत का माहौल है।
वर्तमान में छात्रावास के इसी पुराने और जर्जर भवन में 73 छात्राएं रहकर अपनी पढ़ाई कर रही हैं। भवन की छत और दीवारों में कई स्थानों पर गहरी दरारें दिखाई दे रही हैं, जिससे कभी भी गंभीर दुर्घटना होने की आशंका बनी हुई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि भवन अब रहने योग्य नहीं रह गया है और छात्राओं की सुरक्षा को देखते हुए जल्द नया छात्रावास बनाया जाना चाहिए।
छात्रावास में मूलभूत सुविधाओं का भी गंभीर अभाव है। बिजली आपूर्ति बाधित होने पर पूरे परिसर में अंधेरा छा जाता है, क्योंकि यहां जनरेटर की कोई व्यवस्था नहीं है। परिसर में स्थापित सोलर जलमीनार भी पिछले पांच वर्षों से खराब पड़ा है। ऐसे में सभी छात्राओं को पानी के लिए केवल एक चापाकल पर निर्भर रहना पड़ता है।
छात्रावास का सामुदायिक शौचालय भी बदहाल स्थिति में है। उसके दरवाजे टूट चुके हैं और रखरखाव नहीं होने के कारण छात्राओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। बारिश के दौरान परिसर में जलजमाव और कीचड़ होने से आवागमन मुश्किल हो जाता है तथा फिसलकर चोट लगने का खतरा बना रहता है। छात्राओं ने परिसर में पेवर्स ब्लॉक बिछाने की भी मांग उठाई है।
इसके अलावा छात्रावास में डाइनिंग हॉल, कॉमन रूम, पुस्तकालय और साइकिल स्टैंड जैसी आवश्यक सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं। रसोईघर की हालत भी जर्जर है और आज भी भोजन लकड़ी के चूल्हे पर तैयार किया जाता है, जबकि आधुनिक छात्रावासों में गैस की सुविधा उपलब्ध रहती है।
छात्राएं सुमित्रा बोयपाई, संगीता गोडसोरे, रायमुनी पाडेया, श्रीदेवी सवैया और लक्ष्मी हेयं ने बताया कि छत गिरने की घटना के बाद वे कमरों में रहने और रात में सोने से भी डरने लगी हैं। उनका कहना है कि सुरक्षित वातावरण और बुनियादी सुविधाओं के अभाव में पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
छात्रावास की वार्डन स्नेहलता डहंगा ने भी स्वीकार किया कि भवन काफी पुराना और जर्जर हो चुका है। उन्होंने बताया कि छात्राओं की सुरक्षा और भवन की मरम्मत सहित अन्य समस्याओं को लेकर कई बार विभागीय अधिकारियों को लिखित रूप से अवगत कराया जा चुका है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
घटना के बाद अभिभावकों और स्थानीय लोगों ने कल्याण विभाग से तत्काल हस्तक्षेप करते हुए छात्राओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने, जर्जर भवन को बदलने और सभी आवश्यक सुविधाओं से युक्त नए छात्रावास के निर्माण की मांग की है।
