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Bokaro news:– कोतरे-बसंतपुर पचमो कोल परियोजना एवं केंदला-दनिया रेलवे लाइन निर्माण से प्रभावित रैयतों एवं विस्थापितों की समस्याओं, अधिकारों एवं मांगों को लेकर पचमो पंचायत अंतर्गत ग्राम हूरदाग में विशाल ग्राम सभा में क्षेत्र के सैकड़ों ग्रामीणों, महिलाओं एवं युवाओं ने भाग लिया। कार्यक्रम का आयोजन किसान अधिकार संघर्ष समिति, महिला मंडल तथा प्रभावित रैयत एवं विस्थापित संघर्ष समिति के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। सभा की अध्यक्षता वरिष्ठ किसान नेता डोमन महतो ने की।
ग्राम सभा में मुख्य अतिथि के रूप में राज्यसभा सांसद, जनता दल (यू) झारखंड प्रदेश अध्यक्ष एवं कोयला एवं खान सलाहकार समिति के सदस्य माननीय खीरू महतो उपस्थित हुए। कार्यक्रम के प्रारंभ में डोमन महतो एवं ग्रामीणों की ओर से सांसद खीरू महतो का पुष्पगुच्छ देकर भव्य स्वागत किया गया। वहीं जनता दल (यू) के प्रदेश महासचिव राजू महतो का भी माला पहनाकर अभिनंदन किया गया।
कार्यक्रम का संचालन श्री चैतलाल प्रसाद महतो ने किया। इस अवसर पर प्रभावित रैयतों एवं विस्थापितों की ओर से प्रधानमंत्री के नाम संबोधित 13 सूत्री मांग पत्र सांसद श्री खीरू महतो को सौंपा गया। मांग पत्र में बोकारो जिला के गोमिया प्रखंड के अंतर्गत कोतरे,बसंतपुर, पचमो,हुरदाग ,रहावन ,इचाकडीह ,जमनी जारा , प्रुणापानी एवं आसपास के क्षेत्रों के भूमि स्वामियों, किसानों तथा विस्थापित परिवारों की समस्याओं को विस्तार से रखा गया।
ग्रामीणों ने मांग की कि कोतरे मौजा में प्रस्तावित लगभग 350 एकड़ भूमि अधिग्रहण की स्थिति में प्रत्येक प्रभावित रैयत को उसकी भूमि के बदले रोजगार दिया जाए तथा कोल इंडिया अपनी नीति के अनुरूप भूमि का अधिग्रहण करे। मांग पत्र में वर्तमान एवं भावी उत्पादन को देखते हुए रेलवे साइडिंग एवं कोयला परिवहन से प्रभावित परिवारों को प्राथमिकता के आधार पर नौकरी देने, सभी प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की व्यवस्था सुनिश्चित करने तथा उचित मुआवजा प्रदान करने की मांग की गई।
ग्रामीणों ने यह भी कहा कि कोयला खनन एवं रेलवे लाइन निर्माण के कारण हजारों एकड़ कृषि भूमि प्रभावित हो रही है, जिससे किसानों की आजीविका पर गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है। इसलिए भूमि के वर्तमान बाजार मूल्य के अनुरूप मुआवजा, आवासीय भूमि का मूल्यांकन तथा पुनर्वास पैकेज को तत्काल लागू किया जाए। मांग पत्र में यह भी उल्लेख किया गया कि प्रभावित रैयतों के साथ पूर्व में किए गए समझौतों एवं न्यायालयीय आदेशों का सम्मान करते हुए लंबित मामलों का निष्पादन किया जाए।
सभा को संबोधित करते हुए सांसद खीरू महतो ने कहा कि विकास परियोजनाओं से प्रभावित लोगों के अधिकारों की रक्षा करना सरकार एवं जनप्रतिनिधियों का दायित्व है। उन्होंने आश्वासन दिया कि ग्राम सभा द्वारा प्रस्तुत मांग पत्र को प्रधानमंत्री, कोयला मंत्रालय, राज्य सरकार एवं संबंधित विभागों के समक्ष मजबूती से रखा जाएगा तथा प्रभावित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए हरसंभव प्रयास किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि विकास और विस्थापन के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है तथा किसी भी परियोजना के कारण स्थानीय लोगों के हितों की अनदेखी नहीं की जा सकती। उन्होंने प्रभावित रैयतों को भरोसा दिलाया कि उनकी समस्याओं के समाधान के लिए संबंधित अधिकारियों एवं परियोजना प्रबंधन से वार्ता की जाएगी।
ग्राम सभा में वक्ताओं ने कहा कि वर्षों से प्रभावित परिवार रोजगार, पुनर्वास और उचित मुआवजे की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी समस्याओं का समुचित समाधान नहीं हुआ है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रभावितों की मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक दायरे में रहकर व्यापक जनआंदोलन चलाया जाएगा।
इस अवसर पर सीताराम महतो, आकाश करमाली, जानकी महतो, हेमलाल रजवार, जगदीश रजवार, जीतू करमाली, उमेश रजवार, महेश रजवार, हीरालाल करमाली, प्रवीण महतो, जलेश्वर महतो, पंचायत समिति सदस्य श्रीमती रेणु देवी, रोहन राम, बिरजू राम, नरेश महतो, धनेश्वर महतो ,ननकू महतो,हरिलाल महतो,जैठत राजन करमाली,बुधन महतो सुरेश महतो सहित सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण महिला-पुरुष उपस्थित थे।
सभा के अंत में प्रभावित रैयतों एवं विस्थापितों ने एक स्वर में अपने अधिकारों की लड़ाई जारी रखने तथा क्षेत्र के विकास के साथ स्थानीय लोगों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करने का संकल्प लिया।
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