Beijing, China: आपने पहाड़ों के बीच, समुद्र के ऊपर और शहरों के बीच से गुजरते हाईवे तो देखे होंगे, लेकिन चीन के गुइयांग शहर की तस्वीर कुछ अलग है। यहां बहुमंजिला रिहायशी अपार्टमेंट्स के ठीक ऊपर से हाईवे गुजरता है। सड़क पर जब गाड़ियां तेज रफ्तार से गुजरती हैं तो नीचे रहने वाले लोगों को शोर के साथ कंपन भी महसूस होता है। इसके बावजूद यहां बड़ी संख्या में लोग रह रहे हैं और यह जगह अपनी अनोखी बनावट के कारण चर्चा में रहती है।
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अपार्टमेंट्स के ऊपर से गुजरता है शुइकोउसी ओवरपास
इस अनोखे ओवरपास को शुइकोउसी ब्रिज के नाम से जाना जाता है। यह सामान्य हाईवे की तरह खाली जमीन या पहाड़ों के बीच से नहीं गुजरता, बल्कि इसके नीचे बहुमंजिला रिहायशी इमारतें मौजूद हैं। यही वजह है कि इसकी तस्वीरें देखने पर पहली नजर में यकीन करना मुश्किल हो जाता है कि सड़क और रिहायशी इमारतें इतनी करीब हो सकती हैं।
बताया जाता है कि शुइकोउसी ओवरपास का निर्माण 1997 में पूरा हुआ था। इसके बाद तेजी से बढ़ते गुइयांग शहर में आवास के लिए जमीन की कमी बड़ी चुनौती बन गई। शहर में कम कीमत वाले घरों की जरूरत थी, लेकिन केंद्रीय इलाकों में पर्याप्त जमीन उपलब्ध नहीं थी।
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पुल के नीचे खड़ी कर दी गईं बहुमंजिला इमारतें
ऐसे में पुल के नीचे मौजूद जगह को आवासीय निर्माण के लिए इस्तेमाल किया गया। ओवरपास बनने के करीब दो साल बाद 1999 में इसके नीचे बहुमंजिला रिहायशी इमारतों का निर्माण किया गया। इस व्यवस्था का फायदा यह हुआ कि लोगों को शहर के भीतर ही रहने की जगह मिली। यहां से काम और दूसरी जरूरी जगहों तक पहुंचना भी आसान था। हालांकि इसके साथ उन्हें हाईवे से आने वाले शोर और कंपन को भी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनाना पड़ा।
गाड़ियां गुजरती हैं तो महसूस होता है कंपन
रिहायशी इमारतों और हाईवे के बेहद करीब होने के कारण वाहनों की आवाज नीचे तक पहुंचती है। भारी वाहनों के गुजरने से कंपन भी महसूस किया जाता रहा है। शुरुआत में माना गया था कि लगातार ट्रैफिक और शोर के कारण लोग यहां रहना पसंद नहीं करेंगे। इसके बावजूद समय के साथ लोगों ने इस माहौल के साथ खुद को ढाल लिया और यह जगह गुइयांग की अनोखी पहचान बन गई।
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भारी ट्रकों की आवाजाही पर लगाई गई रोक
स्थानीय लोगों की परेशानी कम करने के लिए बाद में ओवरपास पर भारी और बड़े ट्रकों की आवाजाही को प्रतिबंधित किया गया। इससे शोर और कंपन को कम करने में मदद मिली। शुइकोउसी ओवरपास और उसके नीचे बनी रिहायशी इमारतें आज घनी आबादी वाले शहरों में सीमित जगह के इस्तेमाल का एक बेहद असामान्य उदाहरण मानी जाती हैं। सोशल मीडिया पर भी इसकी तस्वीरें और वीडियो समय-समय पर लोगों का ध्यान खींचते हैं।




