Koderma news: मॉडर्न पब्लिक स्कूल, झुमरी तिलैया के प्रांगण में मंगलवार को शिक्षकों के व्यावसायिक उन्नयन के तहत ‘प्रभावी निर्णय क्षमता’ विषय पर एक दिवसीय गहन शिक्षक प्रशिक्षण कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। इस विशेष कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों में त्वरित, संतुलित, विवेकपूर्ण एवं नैतिक निर्णय लेने की क्षमता का विकास करना था । ताकि वे कक्षा और विद्यालय परिसर में उत्पन्न होने वाली विभिन्न चुनौतियों का सामना प्रभावी ढंग से कर सकें।
कार्यशाला के मुख्य वक्ता अविनाश मिश्रा ने सत्र को संबोधित करते हुए आधुनिक शिक्षा पद्धति में शिक्षक की बदलती भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कक्षा प्रबंधन छात्र अनुशासन, खेल गतिविधियों के संचालन तथा अप्रत्याशित आपातकालीन परिस्थितियों में एक शिक्षक द्वारा निभाए जाने वाले उत्तरदायित्वों पर विस्तार से व्यावहारिक चर्चा की।
शिक्षकों को प्रेरित करते हुए अविनाश मिश्रा ने कहा, “एक शिक्षक केवल पाठ्यपुस्तक नहीं पढ़ाता, बल्कि वह प्रतिदिन स्कूल परिसर में बच्चों के भविष्य से जुड़े सैकड़ों सूक्ष्म निर्णय लेता है। सही समय पर लिया गया सही और संवेदनशील निर्णय न केवल कक्षा के माहौल को सकारात्मक व अनुशासित बनाता है । बल्कि बच्चों के मानसिक, बौद्धिक और सर्वांगीण विकास की सुदृढ़ नींव भी रखता है।”
प्रशिक्षण सत्र को जीवंत और संवादात्मक बनाने के लिए विभिन्न आधुनिक प्रशिक्षण पद्धतियों का उपयोग किया गया। कार्यशाला के दौरान शिक्षकों को व्यावहारिक अनुभव प्रदान करने के लिए खेल और वास्तविक जीवन की जटिल परिस्थितियों पर आधारित ‘केस स्टडीज’ के विशेष सत्र आयोजित किए गए। इन गतिविधियों के माध्यम से शिक्षकों ने समूह में कार्य करते हुए संकट के समय तनाव मुक्त रहकर सही निर्णय लेने के व्यावहारिक गुर सीखे। विद्यालय के सभी शिक्षकों ने पूरी ऊर्जा और उत्साह के साथ इन गतिविधियों में अपनी सहभागिता दर्ज की।
शिक्षकों का उत्साहवर्धन करते हुए विद्यालय के प्रधानाचार्य गुरु चरण वर्मा ने निर्णय लेने की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने अपने विचार साझा करते हुए कहा, “कार्यक्षेत्र में कभी-कभी तेजी से लिया गया निर्णय त्रुटिपूर्ण हो सकता है, जिसे बाद में अनुभव और सूझबूझ से सुधारा जा सकता है । परंतु दुविधा में रहकर निर्णय न लेना हमेशा सबसे बड़ी भूल साबित होती है। अनिर्णय की स्थिति संस्था और छात्र दोनों के विकास को बाधित करती है।
वहीं विद्यालय की निदेशिका संगीता शर्मा ने दूरदर्शितापूर्ण दृष्टिकोण अपनाने पर बल देते हुए अपने संबोधन में कहा, “एक श्रेष्ठ और आदर्श निर्णय वही है जो किसी तात्कालिक डर या दबाव में आकर नहीं, बल्कि दीर्घकालिक दूरदृष्टि को ध्यान में रखकर लिया जाए। हमारे शिक्षकों के निर्णय में बच्चों के सुनहरे भविष्य की झलक होनी चाहिए।
कार्यशाला के अंत में विद्यालय प्रबंधन द्वारा सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं को प्रशिक्षण सत्र में उनके सक्रिय व अनुकरणीय योगदान के लिए सराहना की गई। कार्यक्रम का औपचारिक समापन सामूहिक रूप से गौरवपूर्ण माहौल में राष्ट्रगान के सामूहिक गायन के साथ हुआ।
