World News: दक्षिण-पूर्व एशिया के दो पड़ोसियों, थाईलैंड और कंबोडिया के बीच पिछले 20 दिनों से सुलग रही युद्ध की आग आखिरकार शांत होती दिख रही है। अंतरराष्ट्रीय दबाव और मानवीय संवेदनाओं के बीच, थाईलैंड ने बुधवार को कंबोडिया के 18 सैनिकों को रिहा कर दिया। यह कदम न केवल एक सैन्य प्रक्रिया है, बल्कि दोनों देशों के बीच भविष्य में शांति बहाली का एक बड़ा ‘सद्भावना संकेत’ भी माना जा रहा है।

यह संघर्ष कितना विनाशकारी था, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि महज़ तीन हफ्तों की लड़ाई में 101 लोगों ने अपनी जान गंवाई और करीब 5 लाख से ज्यादा लोग अपने घरों को छोड़कर भागने पर मजबूर हो गए। आसमान से फाइटर जेट गरज रहे थे और जमीन पर रॉकेटों की बारिश हो रही थी। लेकिन शनिवार दोपहर से लागू हुए युद्ध विराम (सीज फायर) ने इस तबाही पर ब्रेक लगा दिया।

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थाईलैंड के विदेश मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि सैनिकों की वापसी ‘अंतरराष्ट्रीय मानवीय सिद्धांतों’ का सम्मान करने और कंबोडिया के साथ भरोसा बढ़ाने के उद्देश्य से की गई है। वहीं, कंबोडियाई रक्षा मंत्रालय ने इसे रिश्तों के ‘सामान्य’ होने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि बताया है। इन सैनिकों को करीब 155 दिनों तक थाईलैंड की हिरासत में रहना पड़ा था।

रिहाई की यह प्रक्रिया इतनी आसान नहीं थी। क्षेत्रीय दावों को लेकर दोनों देशों के बीच गहरी खींचतान थी। थाईलैंड का तर्क था कि जिनेवा घोषणापत्र के तहत उन्हें इन सैनिकों को रखने का अधिकार है। हालांकि, रेड क्रॉस और आसियान (ASEAN) के पर्यवेक्षकों की कड़ी निगरानी में यह पूरी वापसी सुनिश्चित की गई। कंबोडिया की सैन्य प्रवक्ता माली सोचेता ने पुष्टि की है कि 27 दिसंबर को हुए समझौते के 72 घंटों के भीतर ही इन सैनिकों की सुरक्षित घर वापसी हो गई है।

बता दें कि यह पूरा विवाद जुलाई में तब शुरू हुआ था जब थाई सैनिकों ने कंबोडियाई सीमा के पास 20 सैनिकों को बंदी बना लिया था। अब चंतबुरी और पैलिन प्रांत के बीच बने बॉर्डर चेकपॉइंट पर फिर से शांति की उम्मीद जगी है।

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