Chennai: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव को लेकर राज्य में सियासी हलचल तेज हो गई है। दोनों प्रमुख गठबंधनों के भीतर सीटों के बंटवारे और संतुलन को लेकर चल रही खींचतान ने मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है। एक तरफ एआईएडीएमके के नेतृत्व वाला एनडीए गठबंधन सीटों के तालमेल को अंतिम रूप देने के करीब पहुंच चुका है, वहीं दूसरी ओर डीएमके के नेतृत्व वाले सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस में सहयोगी दलों के बीच असहमति सामने आने लगी है।

एनडीए खेमे से मिली जानकारी के मुताबिक सीट बंटवारे का फॉर्मूला लगभग तय हो चुका है। प्रस्ताव के अनुसार एआईएडीएमके करीब 170 सीटों पर चुनाव लड़ सकती है, जबकि भाजपा को 25 से 29 सीटें मिल सकती हैं। इसके अलावा पीएमके को 18 और एएमएमके को 10 सीटें मिलने की संभावना है, जबकि छोटे दलों को एक से तीन सीटें दी जा सकती हैं। एएमएमके प्रमुख टीटीवी दिनाकरण ने दिल्ली में गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात के बाद संकेत दिए कि गठबंधन एक मजबूत रणनीति पर काम कर रहा है। उन्होंने विपक्ष पर हमला बोलते हुए इस गठबंधन की तुलना महाभारत के पांडवों से की। माना जा रहा है कि अगले कुछ दिनों में चेन्नई में होने वाली बैठक के बाद इस पर आधिकारिक घोषणा हो सकती है।

वहीं दूसरी ओर डीएमके गठबंधन में सीटों को लेकर स्थिति उलझी हुई नजर आ रही है। सहयोगी दल टीवीके ने सीट आवंटन से नाराज होकर गठबंधन छोड़ने का ऐलान कर दिया है। बताया जा रहा है कि टीवीके दो सीटों की मांग कर रही थी, लेकिन उसे केवल एक सीट की पेशकश की गई। इसके अलावा सीपीएम भी अपनी मांग पर अड़ी हुई है और पार्टी के भीतर इस पर चर्चा जारी है कि प्रस्ताव स्वीकार किया जाए या अलग रास्ता अपनाया जाए। डीएमके अब तक सहयोगियों को 43 सीटें दे चुकी है, जिसमें कांग्रेस को 28, सीपीआई को 5 और एमडीएमके को 4 सीटें शामिल हैं। वीसीके के साथ भी बातचीत जारी है, जहां सीटों की संख्या को लेकर समझौते की कोशिश हो रही है।

फिलहाल तमिलनाडु की राजनीति पूरी तरह गठबंधनों के समीकरणों पर टिकी हुई है। जहां एनडीए एकजुटता दिखाने में जुटा है, वहीं डीएमके के सामने सहयोगियों को संतुष्ट रखना बड़ी चुनौती बन गया है। आने वाले दिनों में तस्वीर साफ होने की उम्मीद है।

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